Rajasthan News: राजस्थान के राजकीय वृक्ष 'खेजड़ी' को बचाने की गूंज अब पूरे प्रदेश में फैल चुकी है. बीकानेर कलेक्ट्रेट पर जारी महापड़ाव शनिवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया है. आंदोलनकारियों ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए क्रमिक अनशन (Relay Hunger Strike) शुरू कर दिया है, जिसमें मातृशक्ति की भागीदारी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है.
भजनों से विरोध
धरना स्थल का माहौल आज पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा है. अनशन पर बैठी महिलाओं ने हाथ में मंजीरे और ढोलक लेकर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इन भजनों के जरिए सरकार की 'सोती हुई चेतना' को जगाने का प्रयास कर रहे हैं. यह नजारा भावुक करने वाला है, जहां पर्यावरण प्रेमी प्रकृति की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध नजर आ रहे हैं.
दूसरे राज्यों से भी पहुंच रहे लोग
इस आंदोलन की तपिश अब केवल बीकानेर तक सीमित नहीं है. नागौर, सांचौर, गंगानगर और हनुमानगढ़ से लोगों के जत्थे लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं, पर्यावरण प्रेम के इस महाकुंभ में हरियाणा और पंजाब से भी भारी संख्या में लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं.
'ट्री एक्ट' पर पेंच बरकरार
हालांकि सरकार ने बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का लिखित आश्वासन दिया है, लेकिन आंदोलनकारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. उनकी मांग है कि पूरे राजस्थान में हरे पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगे. इसी विधानसभा सत्र में कठोर 'ट्री एक्ट' पारित किया जाए. सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस प्रशासनिक आदेश जारी हो.
'कानून बनने तक अनशन जारी'
NDTV राजस्थान से बातचीत में आंदोलनकारी ने कहा, 'खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, हमारी संस्कृति की पहचान है. जब तक पूरे प्रदेश के लिए कड़ा कानून नहीं बनता, यह महापड़ाव और क्रमिक अनशन जारी रहेगा.'
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