Bikaner Naharbandi News: राजस्थान का पश्चिमी इलाका सूरज की तपिश से जल रहा है. हालत यह है कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है. बीकानेर में भी गर्मी अपने चरम पर है. ऐसा लगता है कि सुबह होते ही सूरज आग उगलने को तैयार है, जिसके कारण लोगों ने घरों से बाहर निकलना कम कर दिया है. एक तरफ जहां तेज गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा नहरबंदी (Naharbandi) ने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. क्योंकि आने वाले समय में जिले के निवासियों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
21 मार्च से आंशिक और 5 अप्रैल से 5 मई तक पूरी नहरबंदी
दरअसल, पश्चिमी राजस्थान की लाइफलाइन कही जाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना के रखरखाव के लिए जिले में नहर बंद की जा रही है, जो 21 मार्च से आंशिक रूप से और 5 अप्रैल से 5 मई तक पूरी तरह बंद रहेगी, जिसकी जानकारी कल (सोमवार) दी गई थी. जिससे बीकानेर के शहरी क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या होने की संभावना है.
बीकानेर शहर को रोजाना 145 MLD पानी की होती है जरूरत
इस पूरी नहरबंदी के दौरान शहर को लगातार 7 दिन और फिर हर दूसरे दिन पानी मिलेगा. नहर बंदी के बिना बीकानेर शहर को रोजाना 145 MLD पानी की जरूरत होती है। नहर बंदी के दौरान, जल आपूर्ति विभाग बिछवाल और शोभासर जलाशयों को भरने का काम कर रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीण इलाकों में तालाबों को भरने का काम भी तेज़ी से किया जा रहा है, ताकि आने वाले गर्मी के दिनों में आम लोगों को पीने के पानी की कम से कम कमी का सामना करना पड़े.
ट्रिब्यूनल सदस्य टीम नहरी पानी की स्थिति का ले रही है जायजा
इसके अलावा रावी- व्यास ट्रिब्यूनल सदस्य टीम पंजाब से मिलने वाले नहरी पानी की स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रदेश के जिलों का दौरा कर रही है. ट्रिब्यूनल की टीम ने करीब 70 सदस्यों के साथ बीकानेर, छत्तरगढ़, शोभासर माइनर, बज्जू केनाल का निरीक्षण किया. जहां पूरा इंदिरा गांधी नहर का पूरा सिस्टम देखा. उन्होंने माना कि राजस्थान के हिस्से का पूरा पानी अंतिम छोर तक तक नहीं पहुंचा. जिसके चलते नहर बंदी पांच दी यानी 26 मार्च तक सरक सकती है.
करीब 21 करोड़ रुपए के काम होंगे
नहरबंदी के दौरान शहर और ग्रामीण इलाकों में आमजन तक निर्वाध रूप से पानी पहुंचाने के लिए जलदाय विभाग करीब 21 करोड़ रुपए के काम कराएगा.जिसके टेंडर जारी कर दिए गए हैं. वहीं जलदाय विभाग की ओर से हर साल नहरबंदी से पहले आमजन तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजकर बजट मांगा जाता है. इस बार भी करीब 21 करोड़ रुपए के प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजे गए, जिनकी प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल गई है. शहरी क्षेत्र के अंतिम छोर तक और ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की सप्लाई के लिए अलग-अलग काम कराए जाएंगे.