बीजेपी के ये नेता बंगाल चुनाव में निकले 'धुरंधर', जानिए कैसे 'राजस्थान मॉडल' ने ढहा दिया ममता का अटूट किला

इन नेताओं के सही मैनेजमेंट और ग्राउंड कनेक्ट की रणनीति ने बंगाल चुनाव में अहम भूमिका निभाई. 'राजस्थान मॉडल' सफल होने के बाद बीजेपी ने अन्य राज्यों में भी भुना सकती है.

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत में 'राजस्थान मॉडल' काफी कारगर साबित हुआ. सुनील बंसल, भूपेंद्र यादव और राजेंद्र राठौड़ ही नहीं, बल्कि राज्य के कई नेताओं ने बंगाल चुनाव में बखूबी काम किया. राजस्थान के इन नेताओं की फील्ड में सक्रिय मौजूदगी से बीजेपी को बड़ी सफलता मिली. बंगाल की इस जीत के बाद अब भाजपा इस “राजस्थान मॉडल” को एक सफल चुनावी फॉर्मूले के रूप में देख रही है, जिसे आने वाले अन्य राज्यों के चुनावों में भी लागू किया जा सकता है.  

शेखावत-चौधरी की रणनीति के बूते क्लीन स्वीप

उत्तर बंगाल में भाजपा की बढ़त इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी बनकर उभरी. केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूच बिहार जैसे इलाकों में जनसंपर्क और बूथ स्तर तक पहुंचने वाली रणनीति पर काम किया. इसका नतीजा यह रहा कि 28 सीटों में से 27 पर भाजपा ने जीत दर्ज कर एक तरह से क्लीन स्वीप कर दिया.

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पीएम मोदी की सभाओं का जिम्मा इन 2 नेताओं ने संभाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं और रोड शो का जिम्मा राजस्थान के राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने संभाला. इस दौरान अशोक परनामी ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. जिन जिलों में प्रधानमंत्री की सभाएं हुईं, वहां करीब 75 प्रतिशत सीटों पर भाजपा की जीत हुई. यह आंकड़ा बताने के लिए काफी है कि ग्राउंड कनेक्ट और मैसेज डिलीवरी कितनी प्रभावी रही. 

पीएम नरेंद्र मोदी के (सियालदाह) कोलकाता में रोड शो के दौरान तैयारियों का जायजा लेते डॉ. अरुण चतुर्वेदी (फाइल फोटो).

कार्यकर्ता और नेतृत्व के बीच कड़ी सीपी जोशी 

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी और उनकी टीम ने बंगाल में केंद्रीय नेतृत्व और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल का काम किया. चुनाव प्रबंधन का यह मॉडल केवल प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें बूथ मैनेजमेंट, फीडबैक सिस्टम और माइक्रो प्लानिंग जैसे तत्व शामिल थे. आसनसोल में विधायक जितेन्द्र गोठवाल के नेतृत्व में भाजपा ने सभी 7 सीटों पर जीत हासिल कर पिछली बार के प्रदर्शन को कई गुना बेहतर किया. वहीं, कोलकाता उत्तर और दक्षिण जैसे तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में भी भाजपा ने पहली बार प्रभावी सेंध लगाई.  

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