Rajasthan: बूंदी में फसल बर्बाद से किसानों के बिखरे आंसू, तीन महीने बाद से मुआवजे की आस जोह रही पथराई आंखे

Rajasthan News: बूंदी जिले में बीते वर्ष हुई ओलावृष्टि और लगातार मूसलाधार बारिश से बर्बाद हुई किसानों की फसलों के मुआवजे के लिए अन्नदाता अभी तक इंतजार में है. तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है.

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Bundi crop damage News
Meta (AI)

Bundi News: बूंदी जिले में बीते वर्ष हुई ओलावृष्टि और लगातार मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है. धान, सोयाबीन, मक्का और उड़द जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, लेकिन आपदा को तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है. फसल खराब होने के बाद राहत की उम्मीद लगाए बैठे किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है. 

करीब 93 हजार किसानों ने फसल खराबे का किया है आवेदन

मुआवजा आवंटन में हो रही देरी के चलते जिलेभर में किसानों में आक्रोश है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में आपदा के बाद करीब 93 हजार किसानों ने फसल खराबे का आवेदन किया था. इनमें से 58,413 किसानों को पात्र माना गया, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है. किसानों का कहना है कि प्रशासन ने सर्वे और कागजी कार्रवाई तो पूरी कर ली, लेकिन राहत राशि के नाम पर अब तक केवल आश्वासन ही दिए हैं.

कृषि विभाग ने सर्वे किया पूरा 

उधर सर्वे को लेकर बूंदी कृषि विभाग निदेशक राजेंद्र कुमार ने बताया कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसल खराबे को लेकर विभाग की ओर से सर्वे पूरा कर लिया गया है.इसे दो स्तरो पर किया गया है.  पहला पटवार मंडल के माध्यम और दूसरा,   कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों  के जरिए किया जाता है.इन दोनों माध्यमों के जिले के सभी प्रभावित किसानों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कर उनका पूरा डाटा राज्य सरकार को भेज दिया गया है. इसके बाद अब मुआवजा जारी करने का काम राज्य सरकार के स्तर पर होना है. उन्होंने बताया कि अबी राज्य के किसी भी जिले में मुआवजे की राशि जारी नहीं की गई है. पूरे प्रदेश में अनुमानित नुकसान करीब 14 से 1500 करोड़ रुपये का आंका गया है, जबकि अकेले बूंदी जिले में यह आंकड़ा लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये के बीच है.

किसानों ने प्रदर्शन भी किया था 

बता दें कि फसल खराबे और मुआवजे की मांग को लेकर कुछ दिन पहले पूरे जिले में किसानों ने प्रदर्शन किए थे. जिसमें समय पर गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने और शीघ्र मुआवजा देने की मांग उठाई थी. प्रदर्शन के बाद कृषि विभाग ने किसानों से आवेदन पत्र लेकर सभी औपचारिकताएं  पूरी कर लीं, लेकिन तीन माह बीत जाने के बावजूद राहत राशि नहीं दी.  ऐसे में अब फिर किसान संगठन आंदोलन की राह पर निकलने की चेतावनी दे रहे हैं.

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खेतों में कटकर रखी थी फसल, बस मंडी ले जानी थी

बूंदी जिले में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं. हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल बोई जाती है, लेकिन वर्ष 2025 में लगातार हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया. खेतों में खड़ी और काटकर रखी गई धान की फसल पानी में डूब गई.  खेतों में कई दिनों तक जलभराव रहने से फसल सड़ गई और दाना खराब हो गया. बारिश का पानी उतरने के बाद जब किसानों ने फसलों को संभालने की कोशिश की तो  उनके दाने अंकुरित हो चुके थे. मजबूरी में किसान फसल को मंडी लेकर पहुंचे, लेकिन जहां उन्हें प्रति क्विंटल 3 से 4 हजार रुपये तक मिलने की उम्मीद थी, वहां महज 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिले. इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.

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