सवारियों की जगह मैकेनिक खोज रहे हैं बस ऑपरेटर, 12 जिलों में 100 बसों के जब्त होने से मचा हड़कंप

इस महीने 1 जुलाई को दौसा में एक लग्जरी बस में आग लगने से आठ लोगों की जलकर मौत हो गई थी जिसके बाद जजों और न्यायिक सेवा के अधिकारियों ने खुद सड़क पर उतरने का फैसला किया.

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राजस्थान में पिछले दिनों जजों और मजिस्ट्रेटों की सघन चेकिंग से लग्जरी बस ऑपरेटरों में हड़कंप मच गया है. प्रदेश में हाल के समय में स्लीपर बसों में लगातार हो रही घातक दुर्घटनाओं और आग लगने की घटनाओं से चिंतित होकर राज्य के न्यायाधीश अदालतों से निकलकर सड़कों पर उतर आए हैं. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लगभग एक महीने लंबे राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान के तहत न्यायाधीश स्वयं बसों और वाहनों की चेकिंग कर रहे हैं. यह अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशों पर शुरू किया गया था. इसके तहत अब तक 100 से ज्यादा लग्जरी स्लीपर बसें जब्त की जा चुकी हैं.

चेकिंग में मिलीं गंभीर खामियां

आरएएलएसए के सदस्य सचिव जस्टिस हरिओम अत्री के निर्देशों पर शुरू किया गया यह अभियान राज्य के 12 जिलों में चलाया जा रहा है. जयपुर, जोधपुर और अन्य जिलों में अचानक की गई चेकिंग में ऐसी बसें मिलीं जिनमें सिर्फ एक इमरजेंसी एग्जिट था. किसी बस में स्लीपर लेआउट में गैरकानूनी बदलाव किए गए थे. तो किसी में यात्रियों की जगह कम करके बड़े सामान रखने के डिब्बे बनाए गए थे. किसी और बस में गाड़ी का ओवरहैंग जरूरत से ज्यादा था तो किसी में छत पर सामान रखने के कैरियर लगे थे.

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चेकिंगे के दौरान कई बसों में गंभीर खामियां पाई गईं

Photo Credit: NDTV

वर्कशॉप में लगी बसों की कतारें

इस सघन चेकिंग के बाद से प्रदेश के हजारों ऑपरेटर अपनी गाड़ियों में बदलाव करने और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए वर्कशॉप में कतार में खड़े हैं. पूरे राजस्थान में बस वर्कशॉप पर भीड़ बढ़ गई है और ऑपरेटर बसों को सुरक्षित स्थिति में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. 

जयपुर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण कुमार जीनवाल ने कहा, "कई बसों को गैरकानूनी तरीके से बढ़ाया या बदला गया था ताकि सामान रखने की अतिरिक्त जगह बनाई जा सके, जिससे यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हुआ. ऑपरेटर अब उन्हें ट्रांसपोर्ट नियमों के मुताबिक ठीक कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि एक महीने के भीतर लगभग 80 प्रतिशत बसें ठीक कर ली जाएंगी."

इस अभियान में रजिस्ट्रेशन से जुड़ी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं. राजस्थान का रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाने वाली एक गाड़ी मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड पाई गई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई. नियमों का उल्लंघन करते हुए राजस्थान में चल रही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में रजिस्टर्ड दो बसें भी जब्त की गई हैं.

अधिकारियों ने ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि जब्त की गई गाड़ियों की जानकारी पुलिस स्टेशनों को देने से पहले वे यह पक्का करें कि यात्री अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं.

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