केंद्र सरकार के आदेश पर अजमेर दरगाह में खादिमों के लिए पहली बार लाइसेंस व्यवस्था, हो रहा विरोध

केंद्र सरकार के निर्देश और दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 के तहत लागू इस व्यवस्था के अनुसार अब केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को ज़ियारत करवा सकेंगे.

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अजमेर दरगाह

Ajmer Dargah: अजमेर शरीफ दरगाह में व्यवस्था सुधार और पारदर्शिता के उद्देश्य से खादिमों के लिए इतिहास में पहली बार लाइसेंस प्रक्रिया शुरू की गई है. केंद्र सरकार के निर्देश और दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 के तहत लागू इस व्यवस्था के अनुसार अब केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को ज़ियारत करवा सकेंगे. लाइसेंस बनवाने की अंतिम तिथि 5 जनवरी 2026 तय की गई थी, लेकिन अंतिम तिथि निकल जाने के बावजूद एक भी खादिम ने आवेदन नहीं किया. इस स्थिति के बाद अब दरगाह कमेटी इस पूरे विषय पर कानूनी सलाह ले रही है और अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय व केंद्र सरकार से भी विचार-विमर्श कर रही है. दरगाह कमेटी का कहना है कि इस प्रक्रिया से खादिमों की पहचान सुनिश्चित होगी और जायरीन भी अपने खादिम को स्पष्ट रूप से पहचान सकेंगे.

लाइसेंस से आपराधिक प्रवृत्ति  पर लगेगी रोक

नई लाइसेंस व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य आपराधिक प्रवृत्ति के खादिमों की पहचान करना भी है. दरगाह कमेटी का मानना है कि लाइसेंस मिलने से ऐसे तत्वों पर नियंत्रण होगा, जो समय-समय पर विवाद और झगड़ों के कारण दरगाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल बालिग खादिम ही ज़ियारत करवा सकें. वर्तमान में कई बार नाबालिग बच्चे भी ज़ियारत करवाते देखे गए हैं, जो न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से भी गलत माना जा रहा है. लाइसेंस प्रक्रिया से इन सभी खामियों को दूर करने का दावा किया जा रहा है.

दो करोड़ से ज्यादा की राशि के वितरण से जुड़ा मामला

दरगाह कमेटी के नाजिम बिलाल खान ने बताया कि कुछ समय पहले दरगाह परिसर में लगी पीली पेटियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में हटा दिया गया था. इन पेटियों में जमा करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि न्यायालय के निर्देश पर बैंक में जमा कराई गई है. यह राशि खादिमों में वितरित की जानी है, लेकिन इसके लिए खादिमों की वैध पहचान और सूची जरूरी है. नाजिम का कहना है कि यदि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार खादिम लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होती है और लाइसेंसधारी खादिम सामने आते हैं, तो यह रकम उन्हीं में विधिवत रूप से बांटी जा सकेगी.

विरोध कर बताया परंपराओं के खिलाफ 

हालांकि इस नई व्यवस्था का खादिम समुदाय की अंजुमन कमेटी ने विरोध किया है और इसे परंपराओं के खिलाफ बताया है. इसी कारण अब तक किसी भी खादिम ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया. दरगाह कमेटी का कहना है कि लाइसेंस व्यवस्था से दरगाह में अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता आएगी. उदाहरण के तौर पर 30 दिसंबर को दरगाह के गेट नंबर 4 पर दुकान संख्या 8 को लेकर हुए झगड़े का हवाला देते हुए कमेटी ने कहा कि ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान तय कर कार्रवाई संभव हो सकेगी, जिससे दरगाह की छवि धूमिल होने से बचाई जा सके.

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