Chandra Grahan 2026 Timings: राजस्थान समेत पूरे देश में इस साल होली का उत्साह खगोलीय घटनाओं के बीच रहने वाला है. साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण (Chandra Grahan 2026) आज यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है, जिसका सूतक काल प्रात: 6 बजे से प्रारंभ हो चुका है. इस बार का चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) संयोग से फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली (holi 2026) के दिन पड़ा है. जिसके कारण कई राज्य में कल यानी 4 मार्च को होली खेली जाएगी, तो वही राजस्थान (Rajasthan)के रिंगस , जयपुर के गोविंद देव मंदिर सहित कुछ जगहों पर रंगों वाली धुलंहडी (Dhulandi) खेली जाएगी. लेकिन वही शाम के 6 बजते ही आसमान में चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) अपने आखिर पड़ाव में रहेगा जिसके चलते वह 'ब्लड मून' (लाल चांद) का नजारा दिखेगा, जिसे लेकर ज्योतिषियों और खगोल प्रेमियों में भारी उत्साह है.
चंद्रग्रहण क्या होता है और क्यों लाल दिखता है चंद्रमा?
चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. पृथ्वी की छाया दो भागों में होती है-उम्ब्रा (गहरी छाया) और पेनुम्ब्रा (हल्की छाया). जब चंद्रमा पूरी तरह उम्ब्रा में चला जाता है, तब पूर्ण चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) होता है. पूर्ण अवस्था के दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” (Blood Moon) जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी का वायुमंडल नीली रोशनी को बिखेर देता है और लाल रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने देता है. यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश लाल दिखता है. 2026 के ग्रहण में चंद्रमा उम्ब्रा के ऊपरी किनारे से गुजरेगा, जहां धूल कम होने के कारण रंग में हल्का बदलाव संभव है. ओजोन परत के कारण कभी-कभी नीले या फिरोजी किनारे भी दिख सकते हैं.
राजस्थान में कब और कहां दिखेगा ग्रहण?
मौसम विज्ञान केंद्र और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण (Total Lunar Eclipse) है. हालांकि, राजस्थान और भारत के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रस्तोदित' रूप में दिखाई देगा. इसका मतलब है कि जब चांद उदय होगा, तब ग्रहण पहले से ही लगा होगा.
ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण क्या होता है.
'ग्रस्तोदित' का अर्थ होता है ग्रहण की अवस्था में ही उदय होना. जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पहले ही आ चुका हो (यानी ग्रहण शुरू हो चुका हो) और उसी 'ग्रसित' अवस्था में वह क्षितिज (Horizon) पर दिखाई दे, तो उसे 'ग्रस्तोदित' चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
यह स्थिति कब बनती है?
यह स्थिति तब होती है जब ग्रहण का समय और आपके शहर में चंद्रमा के निकलने (Moonrise) का समय आपस में टकराते हैं. वास्तव में ग्रहण दूसरे लोक में दोपहर तीन बजे ही लग जाएगा. लेकिन भारत में यह शाम 6 बजे दिखेगा. जो पूरा सफेद गोल दिखने की बजाय पहले से ही कटा हुआ लाल दिखाई देगा. इसे ही 'ग्रस्तोदित' होना कहते हैं.
चंद्रोग्रहण का समय
ज्योतीषिय गणनाओं के चंद्रग्रहण का आरंभ दोपहर 3:20 बजे होगा, लेकिन तब यह भारत में दृशायमान नहीं होगा. इसके बाद
चंद्र ग्रहण धीरे- धीरे शाम 4: 34 से लगना शुरू हो जाएगा जो पूर्ण समाप्ति की ओर शाम 5:33 तक बढ़ेगा. इसके बाद यह 18:48 (शाम 6:48 बजे) तक पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा.
राजस्थान में दृश्यता
भारत के अधिकांश स्थानों पर चंद्रग्रहण का चंद्रोदय के समय समापन दिखाई देगा, सिवाय उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों के, जहां ग्रहण के पूर्ण चरण का अंत भी दिखाई देगा. वही राजस्थान में इसकी दृश्यता जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे शहरों में शाम को चंद्रोदय के समय (लगभग 6:20 से 6:30 के बीच) करीब 20-30 मिनट के लिए ही होगी. इस दौरान लोगों के केवल चांद का आंशिक हिस्सा कटा हुआ और लालिमा लिए हुए दिखाई देगा.
प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय
| शहर | चंद्रोदय का समय | ग्रहण की समाप्ति |
| जयपुर | शाम 06:29 | शाम 06:47 |
| जोधपुर | शाम 06:41 | शाम 06:47 |
| बीकानेर | शाम 06:38 | शाम 06:47 |
| अजमेर | शाम 06:33 | शाम 06:47 |