मध्य प्रदेश के कूनों नेशनल पार्क के चीतों को राजस्थान के जंगल रास आ रहे हैं. उन्हें यहां के घास वाले मैदान वाले जंगल पसंद आ रहे हैं. चीता अब मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में मूवमेंट कर रहे हैं. यही वजह है कि 2 मार्च को राजस्थान की सीमा में दाखिल हुआ kp-3 चीता वापस मध्य प्रदेश की सीमा में चला गया.
बारां पहुंची चीता Kp-2
चीता kp-2 चीता 14 फरवरी को राजस्थान की सरजमीं बारां वनमंडल में पहुंचा. वह अभी भी यहीं पर मूवमेंट कर रहा है, और दोनों राज्यों की टीमें इसकी मॉनिटरिंग में जुटी हुई है. यह दोनों चीता रिलेशन में भाई हैं. ताजा अपडेट है कि kp-2 चीता बारां रेंज के रेबारपुरा और कोयला वन क्षेत्र में मूवमेंट कर रहा है, और 2 दिन से इसका मूवमेंट इसी वन क्षेत्र में बना हुआ है. जबकि, 2 दिन पहले चीता kp-3 मध्य प्रदेश लौट गया. उसका मूवमेंट राजस्थान के बारां वन मंडल के रामगढ़ क्रेटर वन क्षेत्र में रहा था.
वन्यजीव प्रेमी काफी उत्साहित
चीता के राजस्थान में आने से यहां के वन्यजीव प्रेमी काफी उत्साहित हैं. वह पहले से ही डिमांड कर रहे हैं कि राजस्थान के घास वाले मैदान, जो हड़ौती में है. वहां पर चीता को बसाया जाए. वन्यजीव प्रेमियों ने रविवार को बारां के मांगरोल कस्बे में रैली निकालकर हड़ौती के जंगलों में चीतों को बसाए जाने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि चीतों का मूवमेंट राजस्थान के जंगल में हो रहा है, और यहां का हैबिटेट इन्हें पसंद आ रहा है.
चीता बसाए जाने की मांग
वन्यजीव प्रेमी डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि राजस्थान के जंगल-घास के मैदान मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से काफी बेहतर है. बड़ा एरिया राजस्थान के हड़ौती में चीता के लिए है, और एक जमाना रहा है कि यहां चीते रहे हैं. यही कारण है कि उन्हें बार-बार यहां का जंगल रास आता है. यहां पर एंक्लोजर बनाए जाएं, चीता मित्र बनाए जाएं और स्टाफ को ट्रेंड किया जाए. चीता राजस्थान में खुद-ब-खुद बसना चाहते हैं.
बारां से अर्जुन अरविंंद की रिपोर्ट
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