Chittorgarh News: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. सोमवार को चारभुजा क्षेत्र में नगरपालिका की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. दरअसल, सोशल मीडिया पर एक मार्मिक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दो होमगार्डकर्मी एक सब्जी विक्रेता को जबरन पकड़कर सरकारी गाड़ी की ओर ले जा रहे हैं, जबकि उसका मासूम बच्चा अपने पिता के पैरों से लिपटकर फूट-फूटकर रो रहा है. वह बस अपने पिता को छुड़ाने की गुहार लगा रहा है, लेकिन वर्दीधारियों का दिल नहीं पसीजा.
अंबेडकर जयंती पर संवेदनहीनता का आरोप
इस घटना ने अब सियासी रंग ले लिया है और कांग्रेस ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस नगर अध्यक्ष शंकर बुनकर ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने मंगलवार को कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ पूरा देश संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहा था और दूसरी तरफ नगरपालिका प्रशासन अपनी संवेदनहीनता का परिचय दे रहा था. बुनकर का आरोप है कि प्रशासन का दोहरा चेहरा बेनकाब हो गया है. शहर में बड़े और रसूखदार लोगों ने जमकर अतिक्रमण कर रखा है, लेकिन उन पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन गरीब मजदूरों और रेहड़ी-ठेला लगाने वालों को निशाना बना रहा है.
सोशल मीडिया पर फूटा आमजन का गुस्सा
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. बच्चे का अपने पिता के लिए बिलखना और पुलिस का उसे बेरहमी से खींचना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. इंटरनेट पर लोग इस दृश्य को अमानवीय बता रहे हैं. आम जनता का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का यह तरीका पूरी तरह से गलत है. एक गरीब की रोजी-रोटी छीनने के साथ-साथ उसके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार लोकतंत्र में शोभा नहीं देता.
नगरपालिका ने दी बदसलूकी की सफाई
दूसरी ओर, नगरपालिका ने इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखा है. अतिक्रमण रोधी दस्ते के प्रभारी नरपत सिंह के अनुसार, उन्हें चारभुजा परमाणु बिजलीघर मार्ग पर सड़क किनारे अतिक्रमण की लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इसी आधार पर टीम मौके पर पहुंची थी और नियमानुसार ही कार्रवाई की जा रही थी. नगरपालिका का दावा है कि जब सब्जी विक्रेता को हटाने की कोशिश की गई, तो उसने टीम के साथ बदसलूकी की. इसी के चलते उसे समझाइश देने और पाबंद करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा.
नियम और न्याय के बीच उलझा मामला
फिलहाल रावतभाटा का यह घटनाक्रम चर्चा के केंद्र में है. एक तरफ नगरपालिका इसे नियमों के तहत की गई जरूरी कार्रवाई बता रही है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल और स्थानीय लोग इसे गरीबों के साथ अन्याय और भेदभावपूर्ण रवैया करार दे रहे हैं.
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