राजस्थान के गौरव और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग को बचाने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. प्रशासन ने दुर्ग में अतिक्रमण करके बनाए गए दो मंजिला इमारतों को जमीदोंज कर कड़ा संदेश दिया है. दुर्ग में पिछले कई वर्षों से धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर आखिरकार 8 साल बाद प्रशासन की चुप्पी टूटी है. बताया गया कि 2018 के बाद किले पर पुरातत्व विभाग की जमीन पर किए गए अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई. इन 8 सालों में पुरातत्व विभाग गहरी नींद में सोता रहा और दुर्ग पर अवैध कमर्शियल निर्माण होते रहे.
दुर्ग की जमीन पर खड़ी इमारतें
पुरातत्व विभाग के अधिकारी पुरातत्व की जमीन पर होते अतिक्रमण को मूकदर्शक बनकर देखता रहा और अतिक्रमियों को सिर्फ नोटिस देता रहा लेकिन प्रभावी कार्यवाही नहीं कर सका. 2018 के बाद चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर पुरातत्व विभाग की जमीन पर 8-10 अवैध होटलें व रेस्टोरेंट्स बनकर तैयार हो गए. इन अवैध होटल और रेस्टोरेंट्स के संचालकों का दोनों प्रमुख पार्टियों से जुड़े होने के चलते नियमों को ठेंगा दिखाते हुए पुरातत्व विभाग की जमीन पर गगन चुंम्बी इमारतें खड़ी कर दी.
रतन सिंह महल के तालाब सहित कई ऐतिहासिक तालाबों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है. हद तो यह है कि दुर्ग के भीतर अब गगनचुंबी होटलें और रेस्टोरेंट देखे जा सकते हैं, जिन्होंने इस ऐतिहासिक विरासत के स्वरूप को बिगाड़ कर रख दिया है. चित्तौड़गढ़ विश्व विरासत पर रविवार को अवैध निर्माण और कानून का डंडा चल गया है.
रविवार को चित्तौड़गढ़ दुर्ग में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर
नियमों को ताक पर रखकर हुआ अवैध निर्माण
एएसआई के डिप्टी सुपरिटेंडेंट मनोज द्विवेदी ने बताया कि विभाग के संरक्षित क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर यह अतिक्रमण किया गया था, जिसे लेकर पूर्व में अतिक्रमियों को नोटिस भी दिए थे. उन्होंने जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि राजस्थान में यह पहली और ऐतिहासिक कार्यवाई हैं, जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से इस स्तर पर अतिक्रमण हटाया गया हैं. अगर इसी तरह त्वरित कार्यवाई होती रही तो हमारी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक धरोहरें अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित रहे सकेंगी.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने पहली बार कड़ा एक्शन लेते हुए नामजद एफआईआर भी दर्ज की गई. यह मामला प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल व अवशेष अधिनियम 1958 के उल्लंघन के तहत रतन सिंह महल के सामने अवैध निर्माण करने को लेकर मामला दर्ज हुआ था. विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक चित्तौड़ दुर्ग की सुरक्षा, स्वच्छता, सौंदर्य एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने पिछले दिनों पुरातत्व विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर किले पर पुरात्तव विभाग की जमीन से अवैध निर्माण हटाने को लेकर सख्त निर्देश दिए थे और उसका इम्प्लीमेंट भी देखने को मिला.
मंजूरी मिलते ही अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर
दुर्ग क्षेत्र में अवैध निर्माणों व अतिक्रमणों के खिलाफ व्यापक और सख्त अभियान चलाया गया. जिला कलक्टर डॉ. मंजू के निर्देशन में विभिन्न विभागों के संयुक्त दल ने चिन्हित अतिक्रमणों पर कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज की गई. अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि चित्तौड़ दुर्ग केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान है. इसकी मूल संरचना, पुरातात्विक महत्व एवं गौरवशाली विरासत को प्रभावित करने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दुर्ग क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली सामग्री, जैसे रेत, सीमेंट, पत्थर आदि के परिवहन और उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. ऐसी सामग्री को बिना अनुमति दुर्ग क्षेत्र में ले जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस अधीक्षक धमेन्द्र सिंह ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति दुर्ग क्षेत्र में अवैध निर्माण, सरकारी भूमि पर कब्जा अथवा अन्य नियम विरुद्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी. जोधपुर मुख्यालय और दिल्ली केंद्रीय मुख्यालय पर फाइल भेजी गई हैं जो अनुमोदन होने के पश्चात अवैध निर्माण रियाहशी होटल और पक्के रेस्टोरेंट अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी.
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