मीसा बंदियों के लिए CM भजनलाल का बड़ा एलान, पेंशन और मेडिकल अलाउंस बढ़ा, रोडवेज में यात्रा फ्री

सीएम भजनलाल शर्मा ने इमरजेंसी की बरसी पर मीसा बंदियों को तोहफा दिया है. उनके पेंशन और मेडिकल अलाउंस को बढ़ाने के साथ साथराजस्थान रोडवेज की बसों में फ्री यात्रा का ऐलान किया है.

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CM Bhajan Lal Sharma Announcement for MISA Bandi
NDTV

CM Bhajan Lal Sharma Announcement for MISA Bandi : राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने देश में इमरजेंसी के 51 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मीसा बंदियों के सम्मान में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. जयपुर के दुर्गापुरा स्थित सियाम में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी मासिक पेंशन और चिकित्सा सहायता राशि में बढ़ोतरी करने का एलान किया है. राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब प्रदेश के मीसा बंदियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय सुधार होगा.

पेंशन हुई 25 हजार तो चिकित्सा भत्ता हुआ 5 हजार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के अनुसार, अब राजस्थान में मीसा बंदियों को मिलने वाली मासिक पेंशन को 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है. यानी उनकी पेंशन में सीधे 5 हजार रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी की गई .  इसके साथ ही, लोकतंत्र सेनानियों के मासिक चिकित्सा भत्ते में भी वृद्धि की है. अब तक मिलने वाले 1 हजार रुपये के चिकित्सा भत्ते में 4 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है जिसके तहत अब हर महीने 5 हजार का मिलेगा.

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रोडवेज बसों में मिलेगा मुफ्त सफर

पेंशन और चिकित्सा भत्ते के अलावा भजनलाल सरकार ने एक और तौहफा मीसा बंदियों के सम्मान में दिया है. राज्य सरकार ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में लोकतंत्र सेनानियों को मुफ्त यात्रा करने का तोहफा दिया है. इस सुविधा के तहत उन्हें राज्य भर की बसों में निशुल्क यात्रा करने की अनुमति दी गई है. 

संविधान की बात करने वाली कांग्रेस ही लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा

कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज भले ही संविधान और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने की दुहाई देती फिरती हो, लेकिन सच यह है कि आज भी देश के संविधान और लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस से ही है. उन्होंने इतिहास के पन्नों को याद दिलाते हुए कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसने देश के संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को बेरहमी से कुचलने का काम किया था.

कौन है ये मीसा बंदी

दरअसल 1975 में देश में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने देश में आपातकाल घोषित हुआ. राष्ट्रपति की ओर से उस समय देश में आपातकाल की घोषणा के बाद से देश में कई संगठनों के नेताओं को जेल में बंद किया गया था. जिसमें आरएएस से जुड़े स्वयंसेवक भी थे. आपातकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत जेलों में बंद किए गए अलग-अलग संघठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को बीजेपी मीसा बंदियों के नाम से संबेधित करती है.

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