विधायक गणेश घोघरा का सदन में बड़ा बयान, 'अधिकार छीने तो आदिवासी हथियार भी उठाएगा'

अटल आवास योजना के तहत आवंटित जमीन का मुद्दा उठाते हुए घोघरा ने कहा कि भूमाफियाओं और अमीरों को प्लॉट दिए जा रहे हैं, जबकि 100 साल से काबिज आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा.

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कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा

Rajasthan Assembly: कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने विधानसभा में आदिवासी अधिकारों, जमीन आवंटन और गेपसागर झील से जुड़े मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि आदिवासियों के अधिकारों पर अतिक्रमण हुआ तो वे अपने हक के लिए संघर्ष करने को मजबूर होंगे.घोघरा ने कहा कि गांवों में रहने वाले आदिवासियों की मूलभूत जरूरतों को समझा जाना चाहिए. “मंत्री जी, आप भी गांव से आते हैं, गांव और आदिवासियों का दुख-दर्द समझिए,” उन्होंने कहा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि आदिवासी कभी शहर की ओर नहीं गए, बल्कि शहर गांवों की तरफ बढ़ा है, और फिर उन्हीं लोगों को नक्सल कहा जाता है.

जमीन और आजीविका का मुद्दा उठाया घोघरा ने

विधायक घोघरा ने कहा कि क्षेत्र में रोजगार का कोई मुख्य स्रोत नहीं है. अधिकांश आदिवासियों के पास एक-दो बीघा छोटी जमीन है और वे मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं. आरोप लगाया कि उनकी छोटी-सी जमीन भी कुछ लोग छीनना चाहते हैं.

अटल आवास योजना के तहत आवंटित जमीन का मुद्दा उठाते हुए घोघरा ने कहा कि भूमाफियाओं और अमीरों को प्लॉट दिए जा रहे हैं, जबकि 100 साल से काबिज आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा. उन्होंने पांचवीं अनुसूची के तहत जनजाति बहुल क्षेत्र में बरसों से बसे आदिवासियों को बेदखल न करने और उन्हें जमीन आवंटित करने की मांग की.

गेपसागर झील में भ्रष्टाचार का आरोप

गेप सागर झील को लेकर घोघरा ने नगर परिषद पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि झील की जमीन पर प्लॉट काटकर भूमाफियाओं को बेच दिए गए और करोड़ों की जमीन का सौदा हुआ. उनका आरोप है कि झील में आने वाले नाले का पानी भी बंद कर दिया गया, जिससे झील के सूखने का खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि नाला खुलवाया जाए ताकि बारिश का पानी झील में पहुंचे.

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माला कटारा बोर्ड हटाने पर नाराजगी

घोघरा ने डूंगरपुर के ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र डूंगरिया भील और माला कटारा के नाम से जाना जाता है. आरोप लगाया कि रातों-रात “माला कटारा” का बोर्ड हटाकर वहां “जय श्री राम” लिख दिया गया, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति बन सकती है. उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और माला कटारा का बोर्ड पुनः लगाने की मांग की.

विधायक ने कहा कि यदि आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन तेज होगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि जनजातीय क्षेत्र में जमीन, जलस्रोत और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाए.

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