Bharatpur: श्मशान में छाया था अंधेरा, गाड़ियों की हेडलाइट जलाकर करना पड़ा पिता का अंतिम संस्कार, देखें वीडियो

भरतपुर जिले के काली बगीची श्मशान घाट में लाइट न होने के कारण एक बेटे को अपने पिता का अंतिम संस्कार गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी में करना पड़ा.

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गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार
NDTV

Bharatpur News: भरतपुर जिले का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसे देख कर लोग बेहद दंग रह गए. जिसने प्रशासन के आम सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे है. शहर के काली बगीची श्मशान घाट में लाइट न होने के कारण एक बेटे को अपने पिता का अंतिम संस्कार गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी में करना पड़ा. हैरानी की बात यह है कि वहां न तो रोशनी का इंतजाम था और न ही कोई सुध लेने वाला चौकीदार मौजूद था.

गाड़ियों की हेडलाइट्स जलाकर किया अंतिम संस्कार

मोरी चार बाग के रहने वाले विशाल ने बताया कि उनके 70 वर्षीय पिता अशोक कुमार लंबे समय से बीमार थे और सोमवार दोपहर उनका निधन हो गया. शाम करीब 7 बजे जब परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान पहुंचे, तो वहां पसरे घने अंधेरे को देखकर दंग रह गए. श्मशान की एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही थी. मजबूरन परिजनों को अपने गाड़ियों की हेडलाइट्स जलानी पड़ीं, तब जाकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गई.

 नगर निगम आयुक्त ने लाइट ठीक करने के दिए निर्देश

मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त श्रवण विश्नोई ने जानकारी दी कि जैसे ही उन्हें कल इस घटना की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत टीम भेजी. जिसकी जांच में पता चला कि इलाके में तकनीकी फॉल्ट (निप फॉल्ट) की वजह से बिजली गुल थी, इसलिए श्मशान की लाइटें भी बंद हो गईं. इसके बाद तुरंत टीम को लाइट ठीक करने का निर्देश दिया. आयुक्त ने यह भी बताया कि एक महीने पहले भी ऐसी समस्या आई थी जिसे ठीक करा दिया गया था और गार्ड को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए थे.

दो हफ्ते से बंद थी लाइटें

वही श्मशान के बाहर काम करने वाले रामहेत प्रजापत ने बताया कि पिछले 15 दिनों से श्मशान में लाइटें बंद थीं. कई बार चौकीदार को टोकने के बावजूद निगम प्रशासन ने इसे ठीक करना जरूरी नहीं समझा, जब कल रात यह विवाद बढ़ा, तब जाकर आनन-फानन में लाइटें सही की गईं.

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