बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत, अस्‍पताल पहुंचे मंत्री खींवसर ने केवल 2 की मौत ही जांच लायक बताया  

राजस्‍थान के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री गजेंद्र स‍िंह खींवसर के सामने मेड‍िकल कॉलेज प्रशासन ने अपना पक्ष रखा. बताया क‍ि चारों प्रसूताएं गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थीं. हर मौत की वजह अलग-अलग हैं. 

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स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर.
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महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर मेड‍िकल कॉलेज प्रशासन से बात करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस क‍िया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया चिकित्सकीय लापरवाही सामने नहीं आई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 4 मौतों को एक साथ जोड़ा जा रहा है, उनमें से 2 मामलों की परिस्थितियां अलग हैं. मुख्य रूप से बांसवाड़ा अस्पताल की 2 प्रसूताओं की मौत की जांच की जा रही है.

गंभीर हालत में आई थी महिला 

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र स‍िंह खींवसर ने बताया कि मध्य प्रदेश के रतलाम निवासी महिला को पहले से ही गंभीर स्थिति में बांसवाड़ा लाया गया था. अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हालत बहुत ही नाजुक थी, और डॉक्टरों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण उसकी मौत हो गई. दूसरे मामले में महिला ने गर्भपात की दवा लेने के बाद गंभीर संक्रमण और अध‍िक खून बहने की स्थिति में अस्पताल का रुख किया था. इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका. 

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लापरवाही के संकेत नहीं मिले 

मंत्री ने कहा कि शेष दो मामलों में प्रसव के दौरान उत्पन्न गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य मेडिकल कारण सामने आए हैं. अब तक उपलब्ध रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट में चिकित्सकीय लापरवाही के संकेत नहीं मिले हैं. 

सभी की मौत के कारण अलग-अलग थे 

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. योगेश कांचा, PMO डॉ. राजीव गौतम और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने प्रत्येक मामले की मेडिकल हिस्ट्री, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति और उपचार प्रक्रिया की जानकारी साझा करते हुए कहा कि चारों मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से ग्रसित थीं, और प्रत्येक मामले में मौत के कारण अलग-अलग रहे.

पहली मौत 

विशेषज्ञ टीम के अनुसार, पहला मामला मध्य प्रदेश के रतलाम की रेशमा (23) का था, जिसे बहुत ही गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. महिला 9 महीने की गर्भवती थी, और उसका ब्लड प्रेशर 168/129 तक पहुंच चुका था. चिकित्सकों ने तत्काल सीजेरियन ऑपरेशन कर प्रसव कराया, लेकिन इलाज के दौरान सेप्टिक शॉक, फेफड़ों में संक्रमण और हृदय-फेफड़ों से जुड़ी गंभीर जटिलताएं विकसित होने से उसकी मौत हो गई.

दूसरी मौत  

दूसरा मामला घाटोल की लक्ष्मी (21) का था. प्रसव पीड़ा के दौरान जांच में गर्भ में बच्चे के चारो ओर का हरे रंग का पानी पाया गया, जिसके बाद इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन के बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई. विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों की धमनियों में रक्त का थक्का (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) बनने और हृदय की मांसपेशियों के कमजोर पड़ने जैसी जटिलताओं के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

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तीसरी मौत 

तीसरी प्रसूता आबापुरा की रेखा (19) थी. डॉक्टरों के अनुसार, उसने अस्पताल आने से पहले गर्भपात की दवा का सेवन किया था, जिसके बाद लगातार रक्तस्राव और गंभीर संक्रमण की स्थिति में उसे अस्पताल लाया गया.  इलाज के दौरान संक्रमण नियंत्रित करने और रक्तस्राव रोकने के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई. बाद में उसे आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां सेप्टिक शॉक के कारण उसकी मौत हो गई. 

चौथी मौत 

चौथा मामला गढ़ी क्षेत्र के कोनेला गांव की लीला (32) का था. उसे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था. महिला को उच्च रक्तचाप, गर्भ में शिशु का कम वजन और निर्धारित समय से अधिक गर्भावस्था जैसी जटिलताएं थीं. ऑपरेशन के बाद आईसीयू में इलाज के दौरान शरीर में रक्त के थक्के बनने और प्रसवोत्तर जटिलताओं के कारण उसकी मौत हो गई. 

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मंत्री बोले- सभी मामले अलग-अलग 

मीडिया ने भीलवाड़ा और कोटा में सामने आए प्रसूताओं की मौत के मामलों का हवाला देते हुए मंत्री गजेंद्र स‍िंह खींवसर से पूछा कि क्या बांसवाड़ा की घटनाएं भी उसी तरह की हैं. इस पर मंत्रीजी ने स्पष्ट कहा कि सभी मामलों की परिस्थितियां, मेडिकल हिस्ट्री और मौत के कारण पूरी तरह अलग-अलग हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की तुलना करना उचित नहीं होगा.

रिपोर्ट के बाद अंतिम निष्कर्ष 

प्रिंसिपल ने बताया कि चारों मरीजों के उपचार से संबंधित संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं, और गठित जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएंगे. उन्होंने कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा. यदि जांच में किसी भी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही या प्रक्रिया में कमी सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

(कौस्तुभ पांड्या की रिपोर्ट)

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