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This Article is From Feb 12, 2026

Rajasthan: दिल्ली सरकार अपनाएगी राजस्थान का 'डिजिटल फॉर्मूला', ई-गवर्नेंस के मामले में प्रदेश अव्वल

दिल्ली सरकार यूनिफाइड डेटा हब तैयार करने के लिए हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के मॉडल की स्टडी कर रही है. ताकि राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज बनवाने के लिए डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरत खत्म हो जाएगी.

Rajasthan: दिल्ली सरकार अपनाएगी राजस्थान का 'डिजिटल फॉर्मूला', ई-गवर्नेंस के मामले में प्रदेश अव्वल
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली सरकार हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के मॉडल की स्टडी कर रही है. ताकि शहर में लोगों का एक यूनिफाइड डेटा हब बनाया जा सके और अलग-अलग नागरिक-केंद्रित सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी को आसान बनाया जा सके. सरकार का इन्फॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी (IT) डिपार्टमेंट डेटा हब को एक सेंट्रल रिपॉजिटरी के तौर पर डेवलप करने पर काम कर रहा है, ताकि सरकार अपने ई-गवर्नेंस इंटरवेंशन को लागू करने में मदद कर सके.

इकोसिस्टम डेवलप कर रही है राजस्थान सरकार

हाल ही में, डिपार्टमेंट की टीमों ने ई-गवर्नेंस फील्ड में उनकी खास पहलों की स्टडी करने के लिए हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश का दौरा किया. राजस्थान सरकार डिजिटल गवर्नेंस के लिए एक डेटा-ड्रिवन इकोसिस्टम डेवलप कर रही है, जो अलग-अलग नागरिक-केंद्रित सेवाओं को एक करने पर फोकस कर रहा है.

क्यों जरूरी है सिटीजन डेटा हब?

अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि IT डिपार्टमेंट यूनिफाइड डेटा हब में शामिल कानूनी पहलुओं को पूरा करने के लिए एक कंसल्टेंट को हायर करने पर विचार कर रहा है. यूनिफाइड डेटा हब एक सेंट्रल रिपॉजिटरी के तौर पर काम करेगा, जिससे अलग-अलग सरकारी सर्विस का फायदा उठाने या राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अलग-अलग सोशल वेलफेयर पेंशन जैसी किसी भी वेलफेयर स्कीम के लिए अप्लाई करने के लिए डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरत खत्म हो जाएगी.

डेटा प्राइवेसी के लिए कानूनी-व्यवस्था की जरूरत

दिल्ली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, "सिटीजन डेटा हब मॉडल की एक खास बात यह है कि डेटा प्राइवेसी के मुद्दों के कारण इसके लिए कानूनी व्यवस्था की ज़रूरत होती है. इसलिए, सरकार को इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए कोई कानूनी तरीका या कोई और कानूनी व्यवस्था लानी होगी."

योजनाओं के लाभ में डुप्लीकेशन को रोकेगा

डेटा हब का इस्तेमाल नागरिकों के डेटा के लिए एक ही सोर्स के तौर पर भी किया जा सकता है, जिससे सरकारी स्कीम के अयोग्य लाभार्थियों को हटाया जा सकेगा. साथ ही यह डुप्लीकेशन को भी रोकेगा, क्योंकि एक ही लाभार्थी सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी वाली या मुफ्त सर्विस और सुविधाएं ले रहे हैं.

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