डीडवाना के किसान की पर्यावरण बचाने की अनोखी पहल, कपड़े के थैले पर छपवाया शादी का पूरा न्योता

डीडवाना के कुचामन सिटी के एक किसान रामूराम महला ने अपने बच्चों की शादी के लिए कागज के कार्ड के बजाय कपड़े के थैलों पर निमंत्रण छपवाकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है.

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शादी का आनोखा कार्ड
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 Innovative Wedding Card: डीडवाना के कुचामन सिटी से एक प्रेरक पहल सामने आई है. शादी-ब्याह के कार्ड आमतौर पर कुछ दिनों बाद रद्दी या कूड़े के ढेर में नजर आते हैं, लेकिन इस जिले के एक किसान ने इस परंपरा को पूरी तरह बदल दिया है. कुचामन सिटी के किसान रामूराम महला ने अपने बच्चों की शादी के लिए कागज के कार्ड के बजाय कपड़े के थैलों पर निमंत्रण छपवाकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है.

कपड़े के थैले पर छपवाया शादी का निमंत्रण

इस पहल के बारे में रामूराम महला का मानना ​​है कि उनके इस कदम से न सिर्फ़ कागज की बर्बादी रुकेगी बल्कि भगवान की तस्वीरों के अपमान की स्थिति भी रुकेगी.क्योंकि आमतौर पर शादी के लिए छपने वाले रंग-बिरंगे कार्ड कुछ ही दिनों में कचरे का हिस्सा बन जाते हैं.इससे न सिर्फ कागज की बर्बादी होती है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है. इतना ही नहीं, कई बार इन कार्डों पर भगवान की तस्वीरें भी छपी होती हैं, जो बाद में कचरे में पड़ी दिखती हैं.इसे धार्मिक भावनाओं के जरिए से भी सही नहीं माना जाता.

 प्रेरक संदेश शादी के थैले पर है छपवाएं

रामूराम के बनाए ये कपड़े के बैग उच्च गुणवत्ता के हैं और इन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है. इन पर शादी का निमंत्रण करने के साथ-साथ 'पॉलीथीन हटाओ, पर्यावरण बचाओ', 'घर से थैला साथ लेकर जाओ, पॉलीथीन का इस्तेमाल मत करो' और 'बचा हुआ खाना मत छोड़ो' जैसे प्रेरक संदेश भी प्रिंट किए गए हैं. इस तरह यह इनविटेशन सिर्फ एक फॉर्मैलिटी नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक माध्यम बन गया है.

शादी का अनोखा निमंत्रण पत्र देखते हुए
Photo Credit: NDTV

मैसेज लोगों के मन पर छोड़ते है गहरी छाप

रामूराम महला का कहना है कि प्रेरक संदेश लिखवाने के पीछे वजह यह है कि शादी जैसे खुशी के मौके पर दिया गया मैसेज लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ता है. अगर ऐसे इवेंट्स को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए, तो समाज में सकारात्मक बदलाव शुरू हो सकता है.

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अनोखे निमंत्रण पत्र का हर कोई हो रहा कायल

उनके इस कदम को काफी सराहना मिल रही है. जिन परिचितों और रिश्तेदारों को यह अनोखे निमंत्रण मिले है वे सभी इससे प्रभावित होकर प्लास्टिक मुक्त राजस्थान की मुहिम से जुड़ने की बात कह रहे हैं. स्थानीय निवासी ज्ञानाराम रणवां ने इसे समाज के लिए अनुकरणीय कदम बताया। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कर्नल नंद किशोर ढाका ने कहा कि इस प्रकार की सोच ही देश और समाज को आगे बढ़ाती है.

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