राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीटों पर मंथन शुरू, सवाल- कांग्रेस और बीजेपी समीकरण के अनुसार किसे देगी टिकट

भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू, राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. मौजूदा संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है.

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Rajasthan Rajya Sabha Election: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. जून 2026 में प्रदेश की तीन सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इनमें भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू, राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं. मौजूदा संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है. लेकिन असली दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि पार्टियां किसे राज्यसभा भेजेंगी. कांग्रेस और भाजपा दोनों में ही संभावित चेहरों को लेकर मंथन तेज हो गया है.

कांग्रेस को एक और बीजेपी के दो सीट तय

नीरज डांगी और राजेंद्र गहलोत वर्ष 2020 में चुने गए थे और अब छह साल का कार्यकाल समाप्त कर रहे हैं. वहीं रवनीत सिंह बिट्टू अगस्त 2024 में राजस्थान से राज्यसभा पहुंचे थे लेकिन जिस सीट से वे चुने गए उसका कार्यकाल जून 2026 तक ही है. ऐसे में उनका कार्यकाल भी करीब दो साल का ही रहेगा. राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है. इसी वजह से दोनों दलों में उम्मीदवारों को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई है. 

कांग्रेस किसे भेजेगी राज्यसभा

कांग्रेस में इस बार स्थानीय चेहरे को मौका देने की चर्चा भी चल रही है. कांग्रेस की संभावित दावेदारी की बात करें तो पार्टी के भीतर कई नाम चर्चा में हैं. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है और वे मेवाड़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व देने की दलील दे रहे हैं. कांग्रेस महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नाम भी चर्चा में है. जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है. इसके अलावा चूरू से चुनाव लड़ चुके रफीक मंडेलिया भी राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं और दिल्ली में कई नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं.

बीजेपी में भी खींचतान

भाजपा में भी उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू हो गया है. एक सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा भेजने पर विचार किया जा सकता है. वे केंद्र सरकार में मंत्री हैं और सिख समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से पार्टी के लिए अहम माने जाते हैं. दूसरी सीट के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं.

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बीजेपी और कांग्रेस दोनों देखेंगे समीकरण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरण भी अहम भूमिका निभा सकते हैं. ग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से और नेता प्रतिपक्ष दलित वर्ग से हैं. से में पार्टी अल्पसंख्यक या सामान्य वर्ग के किसी चेहरे को मौका देने पर भी विचार कर सकती है. जून 2026 अभी दूर है, लेकिन राज्यसभा चुनाव को लेकर राजस्थान की राजनीति में हलचल अभी से तेज हो गई है. अब देखना होगा कि भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने पत्ते कब खोलती हैं और आखिरकार राज्यसभा की दौड़ में किसे टिकट मिलता है.

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