राजस्थान विधानसभा में अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर बहस के दौरान गांवों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया गया. इस दौरान कुछ सुझाव दिए गए. जयपुर की मालवीय नगर सीट से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ तथा अजमेर दक्षिण से बीजेपी की विधायक अनीता भदेल ने डॉक्टरों की कमी के मुद्दे की चर्चा की और सरकार से इस बारे में ठोस कदम उठाने की मांग की.
कालीचरण सराफ ने कहा कि राजस्थान में लगभग 3000 सरकारी अस्पताल हैं, जिनमें से लगभग 2500 छोटे जिलों और दूरदराज के गांवों में स्थित हैं. लेकिन वहां लगभग 75 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मी जाना नहीं चाहते, वो चाहे डॉक्टर हों या नर्सिंग कर्मी या पैरामेडिकल स्टाफ. उन्होंने कहा,"चाहे जिस भी पार्टी की सरकार हो, अपने राजनीतिक रसूखों का इस्तेमाल कर वे शहरों में डेपुटेशन पर लग जाते हैं. इस वजह से दूरदराज के मरीजों को जिला या संभाग अस्पताल जाना पड़ता है."
डॉक्टरों से भरवाए जाएं बॉण्ड
सराफ ने डॉक्टरों से गांवों में काम करने का बॉण्ड भरवाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा,"नए डॉक्टरों की नियुक्ति हो तो उससे कम-से-कम 50 लाख का बॉण्ड भरवाया जाए. और यह शर्त रखी जाए कि पहले 5 साल उसकी पोस्टिंग दूरदराज के गांवों में होगी."
उन्होंने इसके लिए एक ट्रांसफर पॉलिसी लाने का भी सुझाव दिया और साथ ही शहरी भत्ता बंद करने की मांग की. सराफ ने कहा,"आप शहरों के डॉक्टरों को शहरी भत्ता देना बंद करिए और उनकी जगह ग्रामीण क्षेत्र में काम करनेवाले डॉक्टरों को ग्रामीण भत्ता दीजिए. साथ ही, जो डॉक्टर गांवों में काम करते हैं उनके बच्चों के शहरों में अच्छे स्कूलों में एडमिशन की भी व्यवस्था की जाए और उन्हें प्राथमिकता दिलाई जाए."
अनीता भदेल ने किया समर्थन
वहीं अजमेर दक्षिण से बीजेपी की विधायक अनीता भदेल ने भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों को उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि वे भी विधायक कालीचरण सराफ की मांग का समर्थन करती हैं. उन्होंने भी कहा कि सरकार को डॉक्टरों से 5 साल का बॉण्ड भरवाना चाहिए जिससे वो गांवों में काम कर सकें. उन्होंने साथ ही एक और सुझाव दिया और कहा,"गांवों में डॉक्टरों को जाने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर उन्हें पीजी की परीक्षा में अतिरिक्त अंक देने पर विचार किया जाना चाहिए."
उन्होंने कहा कि गांव और शहरों में मातृ और शिशु मृत्यु दर शहरों से काफी अधिक हैं जिसके लिए गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना ही पड़ेगा जो बिना डॉक्टरों के संभव नहीं. उन्होंने कहा कि गावों में भामाशाहों के योगदान से अच्छी डिस्पेन्सरी बन सकती है और सुविधाएं आ सकती हैं, लेकिन बिना डॉक्टरों के चिकित्सा नहीं हो सकती.
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