केरलम में पायलट की 'उड़ान', सचिन के दम पर कांग्रेस की धमाकेदार वापसी

केरलम में संगठन मजबूत करने से लेकर सत्ता में पार्टी की वापसी तक सचिन पायलट की भूमिका भी अहम रही. बतौर सीनियर ऑब्जर्वर, उन्होंने प्रत्याशी के चयन और चुनाव अभियान के लिए रणनीति तैयारी की.

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केरलम में सचिन पायलट को सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

देश में 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में सिर्फ केरलम ही है, जहां कांग्रेस के लिए गुड न्यूज है. राज्य में 90 सीटों पर जीत के साथ कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है. इस जीत के हीरो में एक नाम सचिन पायलट का भी है. पार्टी ने उन्हें सीनियर ऑब्जर्वर के तौर पर जिम्मा सौंपा था. पायलट ने टिकट वितरण, संगठनात्मक संतुलन और ग्राउंड कैंपेन के लिए रणनीति तैयार की. इसका नतीजा यह रहा कि 5 साल बाद कांग्रेस को फिर से दक्षिण के इस राज्य में सत्ता में काबिज होने का मौका मिला है. 

पायलट का जहां सीधा दखल, वहां ज्यादा फायदा

वरिष्ठ पर्यवेक्षक के तौर पर पायलट ने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जोरदार चुनावी अभियान किया. उन्होंने राज्य के 14 में से 10 जिलों का दौरा कर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम किया. केरलम की जिन सीटों पर पायलट ने सीधे हस्तक्षेप किया, वहां रणनीति काफी बेहतर साबित हुई है. 

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डोर टू डोर अभियान के जरिए लोगों तक पहुंच

सचिन पायलट ने एक दिन में औसतन 5 से 6 प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इनमें बड़ी जनसभाएं, डोर-टू-डोर संपर्क अभियान और रोड शो शामिल रहे. उनके अभियान का फोकस स्थानीय मुद्दों को उठाने और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने पर रहा. पायलट ने लगातार कई दिनों तक मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया. इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला और चुनावी मुकाबले को धार देने की कोशिश की गई.

बंगाल में भी 5 जनसभाएं और 1 रोड शो

पश्चिम बंगाल में भी पायलट ने 24 घंटे में 5 जनसभाएं और एक रोड शो कर मुर्शिदाबाद और मालदा बेल्ट में कांग्रेस के लिए माहौल बनाने की कोशिश की. हालांकि, नतीजे तो पक्ष में नहीं रहे, लेकिन इन इलाकों में कांग्रेस का वोट शेयर 2-3% तक बढ़ता दिख रहा है.

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