जयपुर : फिनटेक पार्क के निर्माण के लिए हज़ारों पेड़ काटने की क़वायद, पेड़ों को बचाने आगे आए लोग

डोल का बाड़ नाम से जाने जाने वाले इस वन क्षेत्र को बचाने की मुहिम चलाने वाले लोग हर दिन निर्माण कार्य रोकने की कोशिश करते हैं. इस दौरान कर्मचारियों और आंदोलनकारियों में तीखी बहस भी होती है

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बुलडोज़र को रोकते पर्यावरण प्रेमी
जयपुर:

जयपुर में फिनटेक पार्क के निर्माण के लिए हजारों पेड़ काटने की कवायद चल रही है. स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं. दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2021 के अपने बजट में जयपुर में फिनटेक पार्क बनाने की घोषणा की थी. यह पार्क रीको की जिस जमीन पर बनना था, वहां बड़ी संख्या में पेड़ उग गये थे. लगभग 40 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में हजारों पेड़ हैं. लेकिन फिनटेक पार्क के निर्माण के लिए यहां लगे हुए सारे पेड़ काटे जाएंगे और उसके बाद फिनटेक पार्क का निर्माण होगा.

डोल का बाड़ नामक इस वन क्षेत्र को बचाने की मुहिम चलाने वाले लोग हर दिन निर्माण कार्य रोकने की कोशिश करते हैं. इस दौरान कर्मचारियों और आंदोलनकारियों में तीखी बहस भी होती है. आंदोलनकारी बुलडोजर के सामने आकर खड़े हो जाते हैं और काम रोकने की कोशिश करते हैं. इस अभियान से जुड़े शमी कहते हैं कि विडंबना यह है कि पेड़ काटकर बनाये जा रहे भवन को रीको पार्क का नाम दिया जाना है. हमें अपने कल को बचाना है तो पेड़ों को बचाना ही होगा.

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हालांकि रीको के अधिकारी और कर्मचारी कैमरे पर कुछ भी कहने से बचते हैं लेकिन आंदोलनकारियों को समझाते हैं कि जो पेड़ यहां से काटे जाएंगे, उन्हें कहीं और शिफ्ट किया जायेगा. जयपुर के पर्यावरण प्रेमी सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं.

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आंदोलनकारी ग्रीष्मा कहती हैं कि अगर शिफ्ट ही करना है तो फिनटेक पार्क को कहीं शिफ्ट कर दिया जाए. इतने पेड़ों को काट कर शिफ्ट करने की क्या जरूरत है?  फिनटेक पार्क कहीं और भी बन सकता है लेकिन इन परिंदों और दूसरे जीवों का आशियाना एक बार उजड़ गया तो दुबारा बस नहीं पायेगा.

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सरकार ने इस 106 करोड़ की लागत से बन रहे फिनटेक पार्क से 3000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है. सरकार चाहती है कि राज्य के आईटी प्रोफेशनल और सीए को काम करने के लिए बेहतर व्यवस्था मिले ताकि वे अपने राज्य से बाहर न जाएं.

लोगों ने आज निर्माण स्थल के एक हिस्से  पर फूल चढ़ाकर उसे कब्रनुमा दिखाने की कोशिश की. आंदोलन में शामिल अरुंधति ने बताया कि इतने पेड़ काटने से जयपुर की हवा तो खराब होगी ही. यहां फिनटेक पार्क बनाने के लिए पेड़ काटकर जो गड्ढे खोदे जा रहे हैं, वे दरअसल कब्र ही हैं. इसलिए हमने यहां फूल चढ़ाए हैं.
 

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