लेपर्ड से बचाने के लिए वन विभाग ने निकाला रास्ता, मुकुंदरा से शुरू हो रहा है प्रयोग

इस तकनीक से लेपर्ड की लोकेशन पर रियल टाइम में नजर रखी जा सकेगी और वह जैसे ही आबादी की ओर बढ़ेगा वन विभाग को अलर्ट मिल जाएगा.

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राजस्थान तथा देश के कई हिस्सों में लेपर्ड का आबादी वाले इलाके में आना एक बड़ी समस्या है

राजस्थान में आबादी क्षेत्रों में लेपर्ड के घुसने और लोगों पर हमलों की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं. राजस्थान के कई जिलों में लेपर्ड जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं. इससे न सिर्फ इंसानों की जान को खतरा है, बल्कि लेपर्ड भी कई बार भीड़ का शिकार हो जाते हैं. अब इन घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए वन्यजीव विभाग एक नई तकनीक का सहारा लेने जा रहा है. पहली बार प्रदेश में आबादी क्षेत्र में आने वाले तेंदुओं के गले में रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे, ताकि उनकी हर गतिविधि और लोकेशन को ट्रेस किया जा सके. 

हर वक्त रखी जा सकेगी लेपर्ड पर नज़र

मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के डीएफओ एस मुथू ने बताया कि लेपर्ड के गले में लगाए जाने वाले रेडियो कॉलर से उसकी लोकेशन रियल टाइम में ट्रेस की जा सकेगी. इससे जैसे ही कोई लेपर्ड आबादी की ओर बढ़ेगा, वन विभाग को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. इस रेडियो कॉलर का पहला एक्सपेरिमेंट कोटा के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में किया जाएगा.

लेपर्ड के गले में डाला जाएगा ख़ास कॉलर
Photo Credit: NDTV

देसी कंपनी ने निकाली तकनीक

डीएफओ एस मुथू ने कहा," सबसे खास बात ये है कि यह रेडियो कॉलर किसी विदेशी कंपनी का नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह से भारत की कंपनी ने बनाया है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो प्रदेश के सभी तेंदुओं को इसी तरह के रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे.

इस रेडियो कॉलर से लेपर्ड की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी. इससे समय रहते रेस्क्यू और लोगों को अलर्ट करना आसान होगा. यही नहीं लेपर्ड के मूवमेंट का भी रेडियो कॉलर से पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा लेपर्ड कितनी दूरी तय करके किस जंगल में पहुंच रहा है या किस आबादी क्षेत्र में पहुंच रहा है.

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वाइल्डलाइफ टूरिज्म के लिए भी यह अभिनव प्रयोग महत्वपूर्ण साबित होगा आने वाले वक्त में लेपर्ड का सटीक वैज्ञानिक डेटा विभाग के पास होगा. वन्य जीव प्रेमी और रिसर्चर भी वन्य जीव विभाग के इस पहल की सराहना कर रहे हैं.

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