Rajasthan: 4 साल बाद नेपाल के गणेश को भरतपुर में मिला परिवार, पति को जिंदा देख पति को जिंदा देख लिपटकर रोने लगी पत्नी

Rajasthan News: राजस्थान जिले के भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम में रविवार को यहां एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
परिवार के साथ गणेश
NDTV

Bharatpur News: राजस्थान के भरतपुर स्थित 'अपना घर' आश्रम  रविवार को एक परिवार के सालों से बिखरे हुए सपनें फिर से जुड़ गए. बीते दिन यहां एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया. नेपाल के रहने वाले गणेश चौधरी, चार साल बाद अपने परिवार से बिछड़ गए थे,  जिन्हें सुरक्षित उनके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया था.

जहर-खुरानी ने छीन ली थी याददाश्त

घटनाक्रम के अनुसार, गणेश चौधरी चार साल पहले मजदूरी करने के लिए नेपाल से कर्नाटक आए थे. एक साल की कड़ी मेहनत के बाद जब वे लगभग 40 हजार रुपये लेकर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में वे जहर-खुरानी गिरोह का शिकार हो गए. अपराधियों ने उन्हें न केवल लूटा, बल्कि नशीले पदार्थ के कारण वे अपनी याददाश्त खो बैठे. दो साल तक वे कहां और किन परिस्थितियों में रहे, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.

अस्पताल से अपना घर तक का सफर

कुछ समय बाद गणेश को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां से जिला चिकित्सा प्रभारी की सूचना पर अपना घर आश्रम की टीम उन्हें भरतपुर ले आई. आश्रम में मिले उचित इलाज के बाद धीरे-धीरे गणेश की याददाश्त वापस आने लगी. जैसे ही उन्हें अपने घर का पता याद आया, आश्रम की पुनर्वास टीम ने नेपाल स्थित अपना घर सेवा केंद्र के माध्यम से उनके परिवार की तलाश शुरू की और सफलता हासिल की.

रोते हुए पति गणेश के गले लगी पत्नी
Photo Credit: NDTV

पत्नी को मिला मांग का सिंदूर

गणेश की पत्नी सुनीता ने बताया कि पिछले चार सालों में उन्होंने कभी अपनी मांग में सिंदूर नहीं भरा, क्योंकि उन्हें पति के जीवित होने पर संदेह था. लेकिन मन में एक उम्मीद बाकी थी. रविवार को चार साल बाद जब पति को दोबारा सामने देख सुनीता की आंखों से खुशी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. वहीं गणेश के वृद्ध पिता जगतराम थारू ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने बेटे की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और हार मानकर भाग्य के भरोसे बैठ गए थे, लेकिन आज उन्हें अपनी बुढ़ापे की लाठी वापस मिल गई है.

Advertisement

सोमवार को पूरी होगी कागजी कार्रवाई

अपना घर आश्रम के सचिव बसंतलाल गुप्ता ने जानकारी दी कि संस्था अब तक 50 से अधिक नेपाली नागरिकों को सकुशल उनके घर पहुंचा चुकी है. सोमवार को सभी कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद गणेश को उनकी पत्नी, नन्ही बेटी और पिता के साथ नेपाल के लिए विदा कर दिया गया.

यह भी पढ़ें: Rajasthan: पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना ने कैंसर से हारी जिंदगी की जंग, अलवर निवास पर ली अंतिम सांस

Advertisement