Rajasthan: गंगानगरी गुलाब ने बदली किसानों की किस्मत, पारंपरिक खेती को भूलकर फूलों से सालाना कामा रहे लाखों का मुनाफा

Rajasthan news: राजस्थान के झालावाड़ में किसान अब गेहूं और सोयाबीन की जगह फूल उगाकर अमीर बन रहे हैं. वह अब गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी की खेती से सालाना लाखों की कमाई कर रहे है जिससे वह आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Jhalawar Flower Cultivation
NDTV

Jhalawar Flower Cultivation: राजस्थान के झालावाड़ जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इलाके में गंगानगरी गुलाब की खेती से शुरू हुआ यह सफर अब नवरंगा, गेंदा और गुलदाउदी जैसे फूलों की खेती तक जा पहुंचा है,जो इलाके के किसानों खेती में एक नई पहचान दिला रहा है. फूलों की खेती को लेकर किसानों का कहना है कि इस बदलाव ने न सिर्फ उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार किया है.

2 बीघा में 5 लाख का मुनाफा

जानकारी के अनुसार, करीब दो बीघा जमीन में फूलों की खेती से किसान सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं, जो पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना अधिक है.इसी मुनाफे को देखते हुए जहां पहले किसान गेहूं, सोयाबीन और चने जैसी फसलें खेतों में उगाते थे, वहीं अब फूलों की खेती कर अपना और अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रहे हैं.

Advertisement

फसल की रखवाली का झंझट भी हो जाता है खत्म
Photo Credit: NDtv

खेत से ही उठ रही फसल, मंडी जाने का झंझट खत्म

फूलों की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों को अपनी उपज को बाजार तक ले जाने की चिंता नहीं करनी पड़ती. व्यापारी पहले से ही किसानों के साथ पूरे साल का सौदा तय कर लेते हैं और खेत से ही फूलों को तौलकर खरीद लेते हैं. इससे किसानों को समय और परिवहन दोनों की बचत होती है.

मुनाफे बहुत, जोखिम कम 

किसानों के अनुसार, इस फसल में जोखिम भी कम है. मौसम की मार और बीमारियों का प्रभाव अन्य फसलों की तुलना में कम पड़ता है. साथ ही, अधिकांश फूलों को मवेशी नहीं खाते, जिससे फसल की रखवाली का झंझट भी काफी हद तक समाप्त हो जाता है. भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की भरमार होने के कारण पूरे साल फूलों की मांग बनी रहती है. शादी-विवाह, पूजा-पाठ और विभिन्न समारोहों में फूलों का उपयोग लगातार होता है, जिससे किसानों को स्थायी बाजार उपलब्ध रहता है.

आर्थिक रूप से फूलों की खेती ने बनाया सशक्त

पारंपरिक खेती में जहां कई बार लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था, वहीं फूलों की खेती ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। बढ़ती आमदनी के चलते अब किसानों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.

यह भी पढ़ें: रविंद्र भाटी से उलझना छोटू सिंह रावणा को पड़ा भारी! भजन संध्या में विधायक के समर्थकों ने की नारेबाजी

Advertisement