Rajasthan News: क्या आप भी हर वक्त किसी अनजाने बोझ तले दबे महसूस करते हैं? जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के तीसरे दिन दुनिया के मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास (Gaur Gopal Das) ने जीवन की उन उलझनों का हल दिया, जिनसे आज का हर युवा जूझ रहा है. उन्होंने मंच से एक ऐसा सवाल पूछा जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया- 'आज आप अपने मन का कौन सा बोझ उतारने को तैयार हैं?'
जिंदगी की 3 बड़ी सीख
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मंच से गौर गोपाल दास ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को बेहद सहजता से साझा किया. उन्होंने कहा कि हम अक्सर मौत को बेवजह कोसते हैं, जबकि असली संघर्ष तो हर दिन की चुनौतियों से पार पाना और जीवन को सलीके से जीना है. यदि आप अपने मन का बोझ उतारना सीख जाएं, तो जीवन का यह सफर खुद-ब-खुद सहज हो जाएगा.
रिश्तों की पेचीदगियों पर बात करते हुए उन्होंने समझाया कि हम प्यार कैसे करते हैं या अपना गुस्सा कैसे जाहिर करते हैं, यह सब हमें अपने परिवार से विरासत में मिलता है. यही पारिवारिक कहानियां और संस्कार हमें रिश्तों में 'रेड' और 'ग्रीन' फ्लैग यानी सही और गलत की पहचान करना सिखाते हैं.
दास ने यह चेतावनी भी दी कि पैसा और सफलता अंत में तब तक बेमानी हैं जब तक आपके पास अपनी खुशियां और गम बांटने वाला कोई अपना न हो, क्योंकि इंसान को अंततः रिश्तों की जरूरत होती है, अकेलेपन की नहीं.
'खुशी सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं'
आज की पीढ़ी (Gen-Z) पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि लोग दुनिया को दिखाने के लिए 'सेल्फी' तो क्लिक कर लेते हैं, लेकिन दिल की बात कहने के लिए उनके पास कोई इंसान नहीं होता. असली खुशी का राज सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं, बल्कि जीवन के किसी एक क्षेत्र को गहराई से समझने और अपनों के साथ वक्त बिताने में है.
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