Rajasthan: ब्रज में 'कृष्णकालीन' धरोहर पर चली कुल्हाड़ी, गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में काटे गए पूजनीय पीलू के पेड़; NGT सख्त

गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में ₹95 लाख की लागत से बन रही 'राधावन वाटिका' विवादों में घिर गई है. बाउंड्री वॉल सीधी करने के चक्कर में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय और प्राचीन पीलू (मिसवाक) के पेड़ों को काट दिया गया. इस बड़ी लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए NGT ने सख्त रुख अपनाया है और डीग कलेक्टर से रिपोर्ट तलब की है.

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दीवार सीधी करने के चक्कर में उजाड़ दी 'कृष्ण की वाटिका', वन विभाग के सामने ही कटे पेड़; अब NGT ने कलेक्टर से मांगी रिपोर्ट
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ड्रीम प्रोजेक्ट योजना राधावन वाटिका (Radhavan Vatika) विवादों के घेरे में आ गई है. गोवर्धन परिक्रमा मार्ग (पूंछरी का लौठा) में विकास के नाम पर उन पीलू के पेड़ों (Salvadora Persica) को काट दिया गया, जिन्हें साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत माना जाता है. अब यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंच गया है.

95 लाख की लागत से हो रहा निर्माण

राधावन वाटिका को 95 लाख रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. विकास के नाम पर हुई इस बड़ी लापरवाही के तहत, 21 और 22 जनवरी 2026 को पाथवे और बाउंड्री वॉल के निर्माण के दौरान ठेकेदार ने कथित तौर पर दीवार को सीधा करने के लालच में 4 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले प्राचीन पीलू के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलवा दी. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये आरोप लग रहे हैं कि जब इन बेशकीमती और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण पेड़ों को काटा जा रहा था, तब वन विभाग के कर्मचारी वहीं मौके पर मौजूद थे, फिर भी विनाश के इस खेल को नहीं रोका गया.

NGT ने मांगा जवाब, प्रशासन में हड़कंप

पेड़ों की कटाई की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए NGT ने जिला कलेक्टर डीग से तथ्यात्मक रिपोर्ट (Factual Report) तलब की है. हालांकि, डीएफओ प्रमोद धाकड़ का कहना है कि उन्हें अभी तक औपचारिक नोटिस नहीं मिला है, लेकिन विभाग ने आंतरिक जांच के लिए सहायक वन संरक्षक को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया है. NDTV राजस्थान से बातचीत में डीएफओ प्रमोद धाकड़ ने कहा, 'हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं. जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.'

पीलू का पेड़ कैसे होते हैं?

यह राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाने वाला एक बहुपयोगी सदाबहार वृक्ष है. इसकी टहनियों का उपयोग प्राकृतिक दातून के रूप में दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है. वहीं भीषण गर्मी के दौरान इस पर लगने वाले लाल-बैंगनी रंग के मीठे फल न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि शरीर को 'लू' के प्रकोप से बचाने में भी बेहद कारगर माने जाते हैं.

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पीलू के पेड़ों का धार्मिक महत्व समझें

ब्रज में पीलू के पेड़ों का महत्व किसी मंदिर से कम नहीं है. गर्ग संहिता में इन पेड़ों का विशेष उल्लेख है. इन्हें राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं का साक्षी माना जाता है. श्रद्धालुओं के लिए ये पेड़ केवल वनस्पति नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र हैं.

सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट और विवाद

बताते चलें कि 15 दिसंबर 2024 को अपने जन्मदिन पर सीएम भजनलाल शर्मा ने इस 1.2 किमी लंबे परिक्रमा पथ विकास परियोजना का शिलान्यास किया था. इसे 4 जोन में विकसित किया जाना था, जिसमें राधावन वाटिका एक मुख्य आकर्षण थी. लेकिन अब विकास और विरासत के बीच छिड़ी इस जंग ने सरकार की योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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