सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी दवाओं को फ्री करने की मांग उठाई. नागौर सांसद ने शुक्रवार (13 मार्च) को गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के महंगे इंजेक्शनों और दवाओं से जुड़ा सवाल पूछा. उन्होंने कहा कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी आनुवंशिक बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाएं और इंजेक्शन अत्यधिक महंगे हैं. इन्हें विदेशों से आयात करना पड़ता है. साथ ही दवाओं और इंजेक्शनों का घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू करने और गरीब मरीजों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना के संदर्भ में भी सवाल पूछा. बता दें कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी बीमारियों के लिए 10 करोड़ रुपए तक के इंजेक्शन आते हैं.
सरकार दे रही है 50 लाख रुपए तक की सहायता
सरकार ने बताया कि 'राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति-2021' के तहत 15 उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से चिन्हित 63 दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए प्रति मरीज 50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. साथ ही सरकार ने औषध क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना को भी लागू किया है, जिसके तहत स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के उपचार में प्रयुक्त एपीआई ‘रिस्डिप्लाम' का उत्पादन भारत में शुरू किया गया है. इसके अतिरिक्त नैटको फार्मा लिमिटेड ने इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारतीय बाजार में लॉन्च किया है.
पीकेसीएल परियोजना का भी उठाया मुद्दा
बेनीवाल ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग भी उठाई. उन्होंने कहा, "यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान के कई जिलों में दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित है. 28 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के बीच इस परियोजना के संबंध में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं. लेकिन अभी तक अंतिम स्वीकृति और वित्तीय संरचना को लेकर स्पष्टता नहीं है. राष्ट्रीय महत्व की परियोजना मानते हुए इसे भी केंद्र की ओर से वित्त पोषित किया जाना चाहिए."
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