'गुनहगार हम लोग हैं, सिफारिश बंद करें' अस्पताल में खाली पदों पर स्वास्थ्य मंत्री खींवसर का तीखा जवाब

स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने कहा कि सरकार कब तक इस घोड़े को चाबुक मारती रहे. फ्री मेडिसिन भी सरकार दे और अस्पताल भी सरकार ही बनाए, ऐसी अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. 

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अस्पताल में खाली पदों पर स्वास्थ्य मंत्री खींवसर का तीखा जवाब

राजस्थान विधानसभा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर हुई लंबी बहस के बाद स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सरकार की नीतियों, भर्तियों और बजट को लेकर विस्तार से जवाब दिया. उन्होंने एक ओर चिकित्सा क्षेत्र में रिकॉर्ड बजट और भर्तियों का दावा किया, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में रिक्त पदों के लिए व्यवस्था की कमियों को भी स्वीकार किया. स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी अस्पतालों में खाली पदों के मुद्दे पर कहा कि गुनहगार हम लोग हैं. उन्होंने विधायकों से अपील करते हुए कहा कि यदि सभी सदस्य यह वादा कर दें कि सिफारिश नहीं करेंगे तो एक भी अस्पताल में पद खाली नहीं रहेगा.

'सिफारिश से इधर से उधर हो जाते हैं'

मंत्री खींवसर ने कहा कि कई जगह अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा लोग बैठे हैं, जबकि कहीं पद रिक्त हैं. कई कर्मचारी कोर्ट चले जाते हैं और सिफारिश के जरिए इधर से उधर हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में एक हजार डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई, लेकिन उनमें से भी कई संशोधन के लिए आ गए. उन्होंने कहा कि यह हमारी कमजोरी है और इसका दुख भी हमें ही झेलना पड़ता है. खींवसर ने सदन में कहा कि सरकार पर लगातार दबाव बनाना उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि सरकार कब तक इस घोड़े को चाबुक मारती रहे. फ्री मेडिसिन भी सरकार दे और अस्पताल भी सरकार ही बनाए, ऐसी अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. भर्तियों के मुद्दे पर मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने पांच साल में 29 हजार भर्तियां की थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने दो साल में 52 हजार 409 भर्तियां की हैं. उन्होंने कहा कि 25 हजार नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को मेरिट के आधार पर पोर्टल पर डालकर उनकी पसंद के अनुसार पोस्टिंग दी गई है. 

'दिल खोलकर सरकार ने मेडिकल पर खर्च किया'

मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की जा रही है. मेडिकल कॉलेजों में फूड कोर्ट बनाए जाएंगे. संभाग मुख्यालयों पर मेडिकल कॉलेजों के पास 500 करोड़ रुपये की लागत से धर्मशालाएं बनाई जा रही हैं जहां मरीजों के अटेंडेंट को निशुल्क रहने की सुविधा मिलेगी. बजट वृद्धि पर बोलते हुए खींवसर ने कहा कि वर्ष 2019-20 में चिकित्सा विभाग का बजट 13 हजार करोड़ रुपये था जो वर्ष 2022-23 में 20 हजार करोड़ रुपये हुआ. 

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वर्तमान सरकार के गठन के बाद 27 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तावित है. मंत्री ने दावा किया कि यह बजट कांग्रेस सरकार की तुलना में 53 प्रतिशत से अधिक है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मेडिकल क्षेत्र में दिल खोलकर खर्च किया है और पैसों का कोई अभाव नहीं है. मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया है.

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