Chandra grahan 2026: 3 नहीं, अब 4 मार्च को मनेगी होली, होलिका दहन के बाद लगेगा चंद्रग्रहण का साया, नोट कर लें सूतक का समय

Chand grahan 2026 Date: साल 2026 का पहला चंद्रगहण लगने जा रहा है, जो खग्रास है. लेकिन यह ग्रहण इस बार होली पर लग रहा है ऐसे में रंगोत्सव की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि आखिर होली कब होगी.

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Chandra grahan 2026

Chandra grahan 2026  Date: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही त्योहारों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. इस बार रंगों का पर्व होली (Holi 2026) खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के फेर में फंस गया है. मार्च महीने में लगने जा रहे साल के पहले चंद्रग्रहण (Chand grahan 2026) ने होली की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के कारण इस बार रंगोत्सव की तारीख में बदलाव हुआ है.

 साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण

साल 2026 खगोलीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस साल कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण शामिल हैं. फरवरी और अगस्त में होने वाले सूर्यग्रहण भारत में अदृश्य रहेंगे, लेकिन  3 मार्च 2026 यानी होलिका दहन की तिथि पर लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसका सीधा असर होली के उल्लास पर पड़ने वाला है. यह छाया रूप में भारत में दिखेगा इसलिए खग्रास चंद्रगण लगेगा.

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 खग्रास चंद्रगण क्या होता है

 वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती, तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. यह घटना केवल पूर्णिमा को ही संभव है. चंद्रग्रहण तीन प्रकार का होता है, पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया. इस वर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि  2 मार्च  2026 (सोमवार) को  पड़ रही है. इसी दिन खग्रास चंद्रग्रहण पड़ रहा है. 

भारत समेत इन देशों में दिखेगा खग्रास चंद्रगहण

खग्रास चंद्रग्रहण  3 मार्च को लगेगा, जिसे पूरे एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जाएगा. इसके अलावा पैसिफिक द्वीपों और उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में भी यह नजर आएगा. भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण दोपहर 03.20 बजे से लेकर शाम 06.47 बजे तक रहेगा. यह भारत में नजर आएगा.

3 मार्च को क्यों नहीं खेल पाएंगे होली?

2 मार्च को होलिका दहन के अगले दिन यानी 3 मार्च को ज्योतिषीय गणना के अनुसार खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा.  वही इसी दिन के बाद रंगोत्सव भी मनाया जाता है. ऐसे में शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, उत्सव या रंग खेलना वर्जित माना गया है. ऐसे में 3 मार्च के अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा. ग्रहण से लगने से उसका सूतक 9 घंटे पहले लगेगा.

समय और सूतक काल का गणित

ज्योतिषियों के अनुसार, 3 मार्च 2026 (फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा) को ग्रहण की स्थिति इस प्रकार रहेगी. ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3:20 बजे से लेकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा. वही इस दौरान चंद्रोदय शाम 5:59 बजे के आसपास होगा. लेकिन ग्रहण से  9 घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा. चूंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण शुरू हो चुका होगा, इसलिए भारत में केवल ग्रहण का 'मोक्ष' (समाप्ति काल) ही दृश्यमान होगा. चंद्रमा पूरी तरह ओझल नहीं होगा, बल्कि पृथ्वी की छाया के कारण थोड़ा धुंधला दिखाई देगा. लेकिन भारत में यह दिखेगा. 

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