Rajasthan Tiger: अलवर के सरिस्का बाघ अभयारण्य में सोमवार (2 फरवरी) को एक बुरी खबर सामने आई है, जहां टेरिटोरियल फाइट के दौरान करीब 6 वर्षीय बाघिन की मौत हो गई. उसके शरीर पर करीब आठ घाव मिले हैं. वहीं मौत के बाद बाघिन का NTCA की गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया है. सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि बाघ परियोजना सरिस्का के अकबरपुर रेंज नाका पृथ्वीपुरा बीट डाबली के वन क्षेत्र में 2 फरवरी 2026 को बाघिन ST-28 की मृत्यु टेरिटोरियल फाइट के कारण हो गयी है.
तीन डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मिलते ही वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, उप वन संरक्षक , पशु चिकित्सक दल और समस्त फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचे बाघिन का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टर की टीम द्वारा किया गया जिसमे उसके समस्त अंग पाए गए . कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिले. बाघिन ST-28 का अंतिम संस्कार राजस्व ,पुलिस एवं स्थानीय लोगों की मौजूदगी में एनटीसीए के निर्धारित प्रोटोकोल के अनुसार किया गया.
क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह ने बताया कि इसकी उम्र करीब 6 साल थी और डाबली के एरिया में पहाड़ की टॉप पर इसकी डेड बॉडी मिली है. इसके पुट्ठे में करीब 8- 9 घाव हैं और उन्होंने संभावना व्यक्त की कि इसकी फाइटिंग इसकी मां ST-14 या बाघिन ST-17 से हो सकती है. उन्होंने बताया कि आज कलाकड़ी चौकी पर इनका पोस्टमार्टम कराया गया और वही अंतिम संस्कार किया गया. संभावना व्यक्त की जा रही है कि यह बाघिन सुकोला तक जाती है . टेरिटरी को लेकर फाइटिंग संभव है.
ST-28 बाघिन का अंतिम संस्कार
ST-14 की बेटी थी ST-28
इधर बताया जा रहा है कि इसकी फाइटिंग बाघिन ST-17 के साथ हुई है, जिसने इसके पिछले पैरो के पट्ठे पर ही जबरदस्त प्रहार किए हैं. जिससे यह घायल हुई है और इसकी डेड बॉडी भी करीब 24 घंटे पुरानी है, जो डाबली के जंगल के पहाड़ पर टॉप पर मिली है. यह अकबरपुर रेंज में आता है लेकिन इसकी मां की लोकेशन दो-तीन दिन से इसके आसपास नहीं है. क्योंकि यह ST-14 की बेटी है . इसकी तीन मादा टाइगर है जो ST-26, ST-27, ST-28 के नाम से है.
इधर वन्य जीव विशेषज्ञ के अनुसार बताया जा रहा है कि कभी भी नर और मादा का संघर्ष नहीं होता. टाइगर में या तो मादा-मादा भिड़ते या नर-नर भिड़ेगा, क्योंकि अगर दोनों अपॉजिट टाइगर हैं नर और मादा तो वह अपने रास्ते से दूसरे ओर चले जाते हैं या फिर संतान उत्पत्ति के लिए इस टेरिटरी में कुछ दिन रहते हैं. बता दें, अब सरिस्का में 49 ही बाघ-बाघिन और शावक रह गए हैं.
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