Kota: सपनों की नगरी कहे जाने वाले कोटा में 7 फरवरी को हुआ एक हादसा अब भी एक परिवार के जीवन में सिसकियां बनकर गूंज रहा है. उस शाम जवाहर नगर थाना क्षेत्र के इंद्रा विहार में एक नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग ढह गई. मलबे में दबकर पश्चिम बंगाल से कोटा आए एक कोचिंग छात्र अरारण्य कर्माकर की मौत हो गई, जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं थी. अब मां सुदीप्ता कर्माकर अस्पताल के एक कमरे में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं
अस्पताल के इस कमरे के बाहर बैठे मृत छात्र के पिता, अभिजीत कर्माकर कहते हैं, "मैंने अब तक पत्नी को बेटे की मौत नहीं बताई…" ये कहते हुए उनकी आवाज भर्रा जाती है. वह कहते हैं,“मेरी पत्नी की हालत इतनी नाजुक है कि मैं उसे हमारे बेटे की मौत की खबर भी नहीं दे पाया. डॉक्टरों ने कहा है कि सदमा जानलेवा हो सकता है."
सुदीप्ता कर्माकर का एक पैर हादसे की वजह से काटना पड़ा
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हादसे में गंभीर रूप से घायल मां सुदीप्ता कर्माकर का एक पैर काटना पड़ा. उनकी कई बार सर्जरी हो चुकी हैं. अभिजीत बताते हैं कि अब तक निजी अस्पताल में इलाज पर 5 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं. परिवार की जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है.
वह हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, कोटा के व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से मदद की अपील कर रहे हैं. उनकी मांग सीधी है,"मेरी पत्नी का इलाज हो जाए, बस इतनी मदद कर दीजिए."
अस्पताल के कॉरिडोर में बैठे अभिजीत की आंखें हर डॉक्टर की ओर उम्मीद से उठती हैं. एक तरफ बेटे की असमय मौत का गहरा सदमा, दूसरी तरफ पत्नी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद उन्होंने जो भी पैसे थे, इलाज में लगा दिए. अब आर्थिक मदद के बिना आगे का इलाज संभव नहीं दिख रहा. कोटा में हुए इस हादसे ने सिर्फ एक इमारत नहीं गिराई, बल्कि एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी.
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