Rajasthan News: राजस्थान के शक्तिपीठों में शुमार ईडाणा माता मंदिर (Idana Mata Temple) में एक बार फिर आस्था का ऐसा अलौकिक नजारा देखने को मिला, जिसे देख भक्त निहाल हो गए. गुरुवार, 29 जनवरी 2026 की सुबह माता रानी ने खुद अपनी शक्ति से अग्नि स्नान (Agni Snan) किया. करीब 11 महीने के लंबे इंतजार के बाद हुए इस चमत्कार के दर्शन पाकर श्रद्धालु खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं.
8 बजकर 50 मिनट पर हुई शुरुआत
आज सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर माताजी के अग्नि स्नान की शुरुआत हुई, जिसमें माता के दरबार में अग्नि स्वतः प्रज्वलित हुई. इस अद्भुत अग्नि स्नान के दौरान लपटें 10 से 12 फीट तक ऊपर उठीं, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. ईडाणा माता के इस अलौकिक दृश्य का इंतजार भक्तों को काफी समय से था, क्योंकि इससे पहले माता ने 18 मार्च 2025 को अग्नि स्नान किया था.
ईडाणा माता का 'अग्नि स्नान' क्या है?
मेवाड़ की महारानी मानी जाने वाली ईडाणा माता के बारे में यह मान्यता है कि जब माता प्रसन्न होती हैं, तो वे स्वयं अग्नि प्रज्वलित कर स्नान करती हैं. इस अग्नि को कोई मनुष्य नहीं जलाता, बल्कि यह अपने आप माता की प्रतिमा के पास प्रकट होती है. भक्त माता को चुनरी और पोशाक चढ़ाते हैं. माना जाता है कि जब यह भार अधिक हो जाता है, तो माता अग्नि स्नान के जरिए इसे भस्म कर देती हैं. यह किसी रहस्य से कम नहीं है कि धधकती आग के बीच भी माता की मूर्ति और उनके श्रृंगार (आभूषणों) को कोई आंच नहीं आती.
भक्तों का उत्साह, जयकारों से गूंजा परिसर
जैसे ही सुबह अग्नि स्नान की सूचना मिली, मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों की भीड़ जमा हो गई. श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर माता की आराधना की और इस दुर्लभ दृश्य को अपनी आंखों में कैद किया. पूरे मंदिर में 'ईडाणा माता की जय' के जयघोष गूंजने लगे. भक्तों का अटूट विश्वास है कि जो भी इस अग्नि स्नान के दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है.
FAQ
1. ईडाणा माता मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के नए जिले सलूम्बर में स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है.
2. माता अग्नि स्नान क्यों करती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रसन्न होने पर माता स्वयं अग्नि प्रकट कर स्नान करती हैं, जिससे चढ़ाई गई चुनरी और अन्य सामग्री भस्म हो जाती है.
3. क्या इस अग्नि से प्रतिमा को नुकसान होता है?
नहीं, यह इस स्थान का सबसे बड़ा चमत्कार है कि भीषण लपटों के बावजूद माता की प्रतिमा और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.
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