राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ पर बुरा फंसा प्रशासन, सुरक्षा एजेंसी भी हैरान, पाक सीमा के पास कैसे बनी चिमनी?

सीमावर्ती इलाके में पाक से हेरोइन और अवैध हथियारों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में चिंता इस बात को लेकर है कि इतनी ऊंची चिमनी तस्करों के लिए नेविगेशन को और आसान बना देगी.

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खाजूवाला क्षेत्र में इस ईंट के भट्ठे का निर्माण हो रहा है.

Bikaner News: बीकानेर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास ईंट भट्ठे के निर्माण ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर दी है. सीमा से सिर्फ ढाई किमी दूरी खड़ी 100 फीट से ऊंची भट्ठ की चिमनी पर सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. खाजूवाला क्षेत्र में इस ईंट के भट्ठे का निर्माण हो रहा है. यह विशाल चिमनी पाकिस्तान की सीमा चौकियों से साफ दिखाई देती है. एजेंसियों ने आशंका जताई है कि पाकिस्तानी एजेंसियां और तस्कर इस ऊंची चिमनी को लैंडमार्क मानकर ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों की सटीक डिलीवरी कर सकते हैं. गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पहले भी ड्रोन के जरिए हेरोइन और अवैध हथियारों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं. 

सवाल- आखिर अनुमति मिली कैसे?

चिंता इस बात को लेकर है कि इतनी ऊंची चिमनी तस्करों के लिए नेविगेशन को और आसान बना देगी. इन भट्ठों पर बाहरी राज्यों के श्रमिक बिना पुलिस वेरिफिकेशन के रह रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी समस्या है. हैरानी इस बात को लेकर भी जताई जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के इतने करीब इस संवेदनशील निर्माण को स्थानीय स्तर पर हरी झंडी दे दी गई.

बीकानेर कलेक्टर ने एसडीएम से मांगा जवाब

जानकारी के मुताबिक, खाजूवाला एसडीएम ने सीमा से महज 2.5 किमी दूर निर्माण कार्य की स्वीकृति दी. साथ ही स्थानीय सरपंच द्वारा एनओसी भी जारी की. मामला सामने आने के बाद बीकानेर और श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर हरकत में आए हैं. बीकानेर कलेक्टर ने खाजूवाला एसडीएम से इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है. प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही है कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में इतनी ऊंची चिमनी की अनुमति किन नियमों के तहत दी गई.  

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