जयपुर की गुलाबी सर्दी में सजेगा साहित्य का महाकुंभ, 15 से 19 जनवरी तक होगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हर साल करीब पाँच लाख लोग भाग लेते हैं. आयोजकों का कहना है कि इससे जयपुर की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होता है. आयोजन के दौरान करीब 2000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है.

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15 जनवरी से शुरू होगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

Jaipur Literature Festival: जयपुर की गुलाबी सर्दी में हर साल साहित्य प्रेमियों को जिस आयोजन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है, वह है जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल. इस बार यह प्रतिष्ठित आयोजन 15 जनवरी से 19 जनवरी तक गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित होगा. शुरुआत में केवल साहित्य और लेखकों तक सीमित रहा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अब एक व्यापक बौद्धिक मंच बन चुका है, जहाँ साहित्य के साथ-साथ विज्ञान, अर्थव्यवस्था, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बदलते समीकरण और दुनिया में बढ़ते संघर्ष जैसे गंभीर विषयों पर भी खुलकर विचार-विमर्श होता है.

फेस्टिवल के आयोजक संजय रॉय ने बताया कि इस वर्ष जनवरी में आयोजित होने वाले फेस्टिवल में चार नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल होंगे. इसके साथ ही बुकर और पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता लेखक भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे. प्रमुख नामों में अर्थशास्त्री एस्तेर डुफ्लो और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी शामिल हैं.

बॉलीवुड अभिनेत्री ज़ीनत अमान, गीतकार जावेद अख्तर, क्रिकेटर शिखर धवन, पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और शतरंज के ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे.

वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कारक भी करेंगे शिरकत 

NDTV से खास बातचीत में संजय रॉय ने बताया कि इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कारक टिम बर्नर्स-ली भी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत करेंगे. साथ ही प्रसिद्ध गणितज्ञ और लेखक मार्कस डु सॉटॉय भी मौजूद रहेंगे, जिनकी किताब द ब्लूप्रिंट्स  एक अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर रही है. उन्होंने भारतीय संस्कृति, मंदिरों और ताजमहल पर भी लिखा है. आयोजकों के अनुसार, बच्चों और युवाओं के लिए ऐसे वैज्ञानिकों और विचारकों को सुनने का यह एक दुर्लभ अवसर होगा.

खुले आसमान के नीचे तर्क-वितर्क और संवाद

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की एक बड़ी खासियत यह रही है कि वह किसी भी विषय को, चाहे वह कितना ही विवादास्पद क्यों न हो, खुले मंच पर रखने से नहीं हिचकता. खुले आसमान के नीचे तर्क-वितर्क और संवाद की इस परंपरा को इस बार भी आगे बढ़ाया जाएगा. इस वर्ष बांग्लादेश के राजदूत मुहम्मद रियाज़ हमीदुल्लाह भी फेस्टिवल में भाग लेंगे.

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आयोजकों के अनुसार, इस बार “कनफ्लिक्ट और अंतरराष्ट्रीय रिश्ते” जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी. इसमें पड़ोसी देशों, अमेरिका सहित वैश्विक राजनीति, दुनिया भर में बढ़ते टकराव, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और भविष्य में संभावित संघर्षों जैसे मुद्दों पर मंथन किया जाएगा. यह समझना ज़रूरी है कि दुनिया में क्या बदल रहा है और भारत के लिए इसका क्या महत्व है.

JLF में हर साल करीब पाँच लाख लोग भाग लेते हैं

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हर साल करीब पाँच लाख लोग भाग लेते हैं. आयोजकों का कहना है कि इससे जयपुर की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होता है. आयोजन के दौरान करीब 2000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है, लोक कलाकारों को मंच मिलता है और होटल बुकिंग, टैक्सी चालकों तथा स्थानीय व्यवसायों को सीधा फायदा पहुंचता है. एक छोटे से मैदान और केवल पाँच लेखकों से शुरू हुआ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल आज एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बन चुका है और उसने विश्व स्तर पर अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली है.

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