आमेर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से दुखद खबर, जन्म के अगले दिन नवजात बाघ शावक की मौत

शावक जन्म से ही कमजोर था और उसे बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. इस घटना से नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शोक का माहौल है.

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बाघिन चमेली ने कल शावक को दिया था जन्म

राजधानी जयपुर के आमेर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां मादा बाघिन चमेली के नवजात शावक की रविवार को मौत हो गई. इस शावक का जन्म कल ही हुआ था, लेकिन जन्म के समय से ही उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही थी. शावक की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू सेंटर के नियोनेटल केयर यूनिट में शिफ्ट किया था. जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगातार उसकी निगरानी और इलाज किया. हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका.  

2024 में गोरेवाड़ा से लाया गया था नाहरगढ़

उपवन संरक्षक (वन्यजीव/चिड़ियाघर) ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि नर बाघ गुलाब और मादा बाघिन चमेली को वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा बायोलॉजिकल पार्क से नाहरगढ़ लाया गया था. वहीं, दोनों की मैटिंग जनवरी माह के पहले पखवाड़े में हुई थी, जिसके बाद इस शावक के जन्म को लेकर पार्क प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में काफी उत्साह था.

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जन्म से काफी कमजोर था बाघिन का शावक

घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शावक जन्म से ही कमजोर था और उसे बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. इस घटना से नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शोक का माहौल है. वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों और कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के प्रजनन और नवजात शावकों की देखभाल को लेकर चुनौतियों को उजागर किया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कैद में जन्म लेने वाले शावकों के लिए शुरुआती समय बेहद संवेदनशील होता है, जहां विशेष निगरानी और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता होती है. हालांकि वन विभाग द्वारा समय रहते सभी जरूरी कदम उठाए गए, लेकिन शावक को बचाया नहीं जा सका. यह घटना वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक सीख के रूप में भी देखी जा रही है.

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