Jaipur Ranked 18th Cultural City: राजस्थान की माटी में कुछ ऐसा जादू है कि यहां की सदियों पुरानी संस्कृतियां और लोक-परंपराएं जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचती हैं, तो दुनिया पलकों पर बिठाकर स्वागत करती है. शायद इसीलिए इसे 'पावणों का घर' कहा जाता है, जहां देहलीज पर आए हर अजनबी का स्वागत हमेशा पूरे खुले दिल के साथ किया जाता है. यहां की इस बेमिसाल मेहमाननवाजी की मीठी कसक जब किसी विदेशी मेहमान के जहन में उतरती है, तो वह अपने देश लौटकर भी सालों साल इसे एक अनमोल याद की तरह अपने सीने से लगाकर रखता है. सात समंदर पार इसी दिल के जुड़ाव का नतीजा है कि आज पूरी दुनिया के नक्शे पर गुलाबी नगरी यानी जयपुर का नाम सोने के अक्षरों में चमका है. महाराजा सवाई जयसिंह के सपनों और बेजोड़ वास्तुकला से सजे इस शहर को वैश्विक स्तर पर दुनिया के सबसे शानदार सांस्कृतिक नगरों की नई फेहरिस्त में 18वां मुकाम हासिल हुआ है.
Jal Mahal
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दुनिया के सबसे बेहतरीन सांस्कृतिक शहरों में शामिल हुआ जयपुर
जयपुर अपनी सादगी, विरासत और अदब के दम पर इस पूरी दुनिया में भारत का इकलौता और अकेला शहर है जिसे इस सूची में शामिल किया गया है. दरअसल यह मुकाम गुलाबी नगरी को प्रसिद्ध वैश्विक मीडिया और ट्रैवल गाइड 'टाइम आउट' (Time Out) के जरिए जारी हाल ही में दुनिया के सबसे बेहतरीन सांस्कृतिक शहरों (World's Top Cultural Cities) की नवीनतम रैंकिंग किए गए एक सर्वे के तहत मिला है जिसमें वैश्विक स्तर पर शहरों की कला, ऐतिहासिक वास्तुकला, स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों, त्योहारों, थिएटर और म्यूजियम की समृद्धता के आधार पर तय की गई है. और जयपुर तो 299 सालों से अपनी राजपूती वास्तुकला , ऐतिहासिकता, शाही रुतबे और परंपराओं को कई पीढ़ियों से बढ़ी भव्यता के साथ सजोए चला रहा आ रहा है.
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पेरिस और लंदन की कतार में खड़ा हुआ जयपुर
इस सर्वे में दुनिया भर के हजारों सैलानियों और स्थानीय निवासियों के इनपुट्स को शामिल किया गया था. जयपुर की राजपूती वास्तुकला, हवा महल, आमेर किला, जंतर-मंतर जैसी यूनेस्को विश्व धरोहरों (UNESCO World Heritage Sites) के साथ-साथ यहां की अनूठी संस्कृति, पचरंगा पहनावा, दाल-बाटी-चूरमा का स्वाद और हस्तशिल्प कला (Handicrafts) ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को बेहद प्रभावित किया. इस गौरवशाली इतिहास के साथ ही जयपुर अब सांस्कृतिक समृद्धि के मामले में पेरिस, न्यूयॉर्क, लंदन और टोक्यो जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्रों के साथ टक्कर कर रहा है. इस रैकिंग में लंदन को पहला स्थान मिला है.
गणगौर
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क्यों खास है जयपुर की संस्कृति?
वैश्विक रिपोर्ट में जयपुर के त्योहारों जैसे- 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल' (JLF), तीज, गणगौर और मकर संक्रांति के उत्सवों को विशेष स्थान दिया गया है. शहर का ग्रिड पैटर्न पर आधारित अनूठा वास्तुशिल्प और यहां के बाजारों (जौहरी बाजार, बापू बाजार) में मिलने वाली जीवंतता इसे दुनिया के अन्य शहरों से बिल्कुल अलग और जादुई बनाती है. यह रैंकिंग न केवल जयपुर के गौरवशाली इतिहास का सम्मान है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध विरासत को भविष्य के वैश्विक पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाने के रास्ते को और बेहतरीन तरीके से दर्शाती है.
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