Jaisalmer News: स्वर्णनगरी में आयोजित 'दादागुरु चादर महोत्सव' के मंच से शुक्रवार को एक ऐसा संदेश निकला जिसने सामाजिक समरसता की नई लकीर खींच दी है. गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वर ने खचाखच भरी धर्मसभा को संबोधित करते हुए दो-टूक कहा, 'जैनियों को हिंदुओं से अलग करने की भूल मत करना. हिंदुस्तान में रहने वाले हर व्यक्ति का पहला धर्म हिंदू है.' आचार्य के इस बयान ने सभा में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के बीच एकता का जोश भर दिया.
दादागुरु की चादर को बताया परमात्मा तक पहुंचने वाली 'नदी'
आचार्य ने दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरी महाराज की पावन चादर की महिमा बताते हुए एक बेहद सरल उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, 'हम एक तिनके के समान हैं और दादा गुरुदेव की चादर एक बहती हुई नदी की तरह है. एक तिनका खुद चलकर समुद्र तक नहीं पहुंच सकता, लेकिन अगर वह नदी में मिल जाए, तो वह नदी उसे लक्ष्य (समुद्र) तक पहुंचा देती है. ठीक वैसे ही, अपने लक्ष्य यानी परमात्मा तक पहुंचने का सबसे सुगम माध्यम दादा गुरुदेव की पावन चादर है.'
'विवाद खत्म करो, भारत को एक करो'
समाज में बढ़ते मतभेदों पर प्रहार करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का खान-पान, होली-दीपावली जैसे त्योहार और संस्कृति एक है. उन्होंने अपील की, 'अगर हमारे बीच कोई विवाद है, तो उसे खत्म करना होगा. हम सभी संतों को मिलकर देश और समाज के युवाओं को सही मार्ग दिखाना होगा.' उन्होंने विशेष रूप से आज की 'जेन-जी' (Gen-Z) जनरेशन को उदाहरण पेश करने की बात कही, ताकि युवा पीढ़ी भटकाव से बच सके.
'एक भारत, श्रेष्ठ भारत'
आचार्य ने साफ किया कि इस चादर महोत्सव की असली सफलता तभी है जब भारत एक रहे और भारत आगे बढ़े. उन्होंने कहा कि संतों का संकल्प युवाओं को जीवन जीने का सही रास्ता दिखाना है. इस दौरान मंच पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी ने इस आध्यात्मिक संदेश को और भी प्रभावी बना दिया. बता दें कि इस महोत्सव के जरिए पूरे विश्व में शांति और एकता का संदेश प्रसारित किया जा रहा है.
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