Rajasthan News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को जैसलमेर के दौरे पर आए हैं. उनके इस दौरे की सबसे चर्चा वाली तस्वीर 'सोनार किले' से आई है. शुक्रवार को भागवत का काफिला जब किले के दशहरा चौक पहुंचा, तो वहां से सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच वे किसी बुलेटप्रूफ गाड़ी में नहीं, बल्कि ई-रिक्शा में सवार होकर निकले. जैसलमेर किले की संकरी और घुमावदार गलियों में ई-रिक्शा पर सवार मोहन भागवत को देखना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था. सादगी के इस अंदाज के साथ वे सीधे पार्श्वनाथ जैन मंदिर पहुंचे.
पार्श्वनाथ मंदिर में माथा टेका, देखी 'अमर' चादर
मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही भागवत सीधे 'मूल गम्भारा' यानी गर्भगृह की ओर बढ़े. वहां उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए और देश की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया. इसके बाद वे प्रसिद्ध 'जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार' पहुंचे. यहां उन्होंने उस ऐतिहासिक और पावन चादर के दर्शन किए, जिसके साथ एक अलौकिक इतिहास जुड़ा है. कहा जाता है कि 11वीं सदी के महान आचार्य जिनदत्त सूरी के अग्नि-संस्कार के समय यह चादर चमत्कारिक रूप से नहीं जली थी. करीब 871 साल के लंबे इंतजार के बाद अब पहली बार इस चादर का विधिवत अभिषेक किया जा रहा है.
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1.08 करोड़ लोग एक साथ करेंगे महापाठ
यह आयोजन कितना भव्य है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कल यानी 7 मार्च को जैसलमेर से एक वैश्विक संदेश जाएगा. मोहन भागवत की मौजूदगी में विश्वभर के 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु एक साथ 'दादागुरु इकतीसा' का सामूहिक पाठ करेंगे. यह अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड होगा. इस दौरान विशेष डाक टिकट और सिक्के का विमोचन भी होगा, जो इस पल को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर देगा. जैसलमेर में फिलहाल 400 संतों और 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा हुआ है.
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डायरी में लिखे दिल के विचार
दर्शन के बाद 'श्री जैसलमेर लोद्रवपुर पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट' ने सरसंघचालक का भव्य बहुमान किया. इस दौरान मोहन भागवत ने मंदिर की 'विजिटर बुक' (अनुभव पंजी) में अपने विचार भी लिखे. किले का कार्यक्रम पूरा करने के बाद वे फिर से ई-रिक्शा के जरिए ही वापस दशहरा चौक लौटे और वहां से उनका काफिला देदांसर मेला ग्राउंड के लिए रवाना हो गया. इस तीन दिवसीय चादर महोत्सव का समापन 8 मार्च को एक भव्य समारोह के साथ होगा.
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