जालोर में सीएमएचओ कार्यालय से जुड़े डेपुटेशन घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि नियम विरुद्ध तरीके से मनचाही जगहों पर डेपुटेशन लगाने के बदले नर्सिंग अधिकारियों से 10 से 20 हजार रुपए तक की वसूली की गई. जब ये डेपुटेशन नियमों के खिलाफ पाए जाने पर रद्द कर दिए गए, तब मामले का खुलासा हुआ. पीड़ित नर्सिंग अधिकारियों ने पीएमओ को लिखित शिकायत देकर अपनी राशि वापस दिलाने की मांग की. आरोप है कि नर्सिंग ऑफिसर सुखराम ने खुद को प्रभावशाली बताया था. साथ ही सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी का नाम लेकर नर्सिंग अधिकारियों को मनचाहे अस्पतालों में लगाने की गारंटी भी दी. इसी की एवज में रकम वसूली गई.
जेडी कार्यालय की जांच में सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालय ने ज्वाइंट डायरेक्टर (जेडी) कार्यालय की जांच में कुछ डेपुटेशन अधिकार क्षेत्र से बाहर और नियम विरुद्ध पाए थे. इसके बाद 28 मार्च को संबंधित डेपुटेशन निरस्त कर दिए गए. डेपुटेशन रद्द होते ही 2 नर्सिंग अधिकारियों ने पीएमओ को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनसे डेपुटेशन के नाम पर पैसे लिए गए थे.
जिला अस्पताल में कार्यरत मुकेश कुमार ने शिकायत में बताया कि नर्सिंग ऑफिसर सुखराम ने 10 हजार रुपए लेकर गांव की पीएचसी में डेपुटेशन का भरोसा दिया. 24 फरवरी 2025 को राशि दी गई. उसी दिन आदेश क्रमांक 788 जारी कर उसे रानीवाड़ा के गांग में लगाया गया और 28 मार्च को यह आदेश निरस्त कर दिया गया.
ऐसे ही एक अन्य नर्सिंग अधिकारी हितेश कुमार ने शिकायत में बताया कि 19 फरवरी को सुखराम ने फोन कर झाब पीएचसी में डेपुटेशन का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि सीएमएचओ से बात हो चुकी है, लेकिन 20 हजार रुपए देने होंगे. अगले दिन सुखराम को 20 हजार रुपए दिए गए और उसी शाम डेपुटेशन आदेश जारी कर दिया गया. लेकिन, 28 मार्च को आदेश रद्द हो गया. अब हितेश ने भी पीएमओ से पूरी राशि लौटाने की मांग की है.
यहां फंसा पेंच
सीएचसी व पीएचसी के कार्मिक सीएमएचओ के अधीन होते हैं. जिला अस्पताल के कार्मिक सीधे तौर पर पीएमओ के अधीन होते हैं. इसके बावजूद सांचौर जिला अस्पताल में कार्यरत 6 नर्सिंग अधिकारियों हितेश कुमार, मुकेश कुमार, राजूराम, सुनील विश्नोई, ओमप्रकाश और प्रकाशचंद के डेपुटेशन सीएमएचओ कार्यालय से बाहर किए गए. नियम विरूद्ध डेपुटेशन मानकर इन्हें रद्द कर दिया गया.
आरोपों पर ऑफिसर ने दी सफाई
आरोपों पर नर्सिंग ऑफिसर सुखराम ने कहा कि मैंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया. कोई भी कुछ भी लिख सकता है. सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी का कहना है कि वहां के एक डॉक्टर रघुनाथ ने शिकायत लिखवाई थी. बाद में उन्होंने खुद कहा कि यह दबाव में लिखवाई गई थी.
इस पूरे मामले में सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली, डेपुटेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इस प्रकरण में जांच और कार्रवाई को किस दिशा में आगे बढ़ाता है.
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