Rajasthan: जालोर के किसान का किनोवा मॉडल 15 देशों तक पहुंचा, सालाना 20 करोड़ का कारोबार

प्रेम प्रकाश ने किसानों के साथ एग्रीमेंट मॉडल शुरू कर फसल की पूर्व-गारंटी खरीद सुनिश्चित की. आज 1500 से 1700 किसान इस नेटवर्क से जुड़े हैं और यूनिट में 50 से अधिक स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं.

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मंडी में फसल नहीं बिकने से आर्थिक संकट में फंसे एक किसान ने हार मानने के बजाय नई राह चुनी और आज वही प्रयोग एक अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मॉडल बन चुका है. सायला उपखंड के बावतरा गांव निवासी किसान प्रेम प्रकाश राजपुरोहित ने संघर्ष को अवसर में बदलते हुए किनोवा की ऐसी श्रृंखला तैयार की, जो भारत सहित 15 देशों तक पहुंच गई है. उनके उद्यम का सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से अधिक है, जबकि व्यक्तिगत आय 25-30 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है.

महज 8वीं पास प्रेम प्रकाश की सोच हालांकि वैश्विक रही. वर्ष 2014 में सरकारी योजना के तहत मिले मुफ्त किनोवा बीजों से उन्होंने 30 बीघा जमीन में 50 किलो बीज बोकर खेती शुरू की. पहली ही फसल में करीब 110 टन उत्पादन हुआ, लेकिन बाजार में खरीदार नहीं मिला. सरकार ने भी खरीद से हाथ खड़े कर दिए, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया. हालांकि इस झटके ने उन्हें पीछे हटाने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

देश-विदेश में किनोवा की प्रोसेसिंग तकनीक का अध्ययन किया

घाटा झेलने के बाद उन्होंने इंटरनेट को अपना गुरु बनाया. देश-विदेश में किनोवा की प्रोसेसिंग तकनीक का अध्ययन किया और वर्ष 2015 में करीब 6 लाख रुपए की लागत से खेत में छोटी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की. धीरे-धीरे यह यूनिट विकसित होकर करीब 3 करोड़ रुपए के आधुनिक प्लांट में बदल गई. वर्तमान में यहां हर साल 3000 से 3500 टन किनोवा प्रोसेस कर निर्यात किया जाता है.

एग्रीमेंट मॉडल शुरू कर फसल की पूर्व-गारंटी खरीद सुनिश्चित की

प्रेम प्रकाश ने किसानों के साथ एग्रीमेंट मॉडल शुरू कर फसल की पूर्व-गारंटी खरीद सुनिश्चित की. आज 1500 से 1700 किसान इस नेटवर्क से जुड़े हैं और यूनिट में 50 से अधिक स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं. किसानों को 60–70 रुपए प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जिससे बावतरा, जीवाणा सहित आसपास के गांवों में किनोवा की खेती तेजी से बढ़ी है. प्रति बीघा केवल 1.5 किलो बीज पर्याप्त है, 2–3 सिंचाई में 100–120 दिन में फसल तैयार हो जाती है और कम यूरिया की जरूरत इसे लागत के लिहाज से भी लाभकारी बनाती है.

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100 किलो में से करीब 70 किलो किनोवा एक्सपोर्ट क्वालिटी का तैयार होता है

प्रोसेसिंग के बाद 100 किलो में से करीब 70 किलो किनोवा एक्सपोर्ट क्वालिटी का तैयार होता है, जिसे 80–82 रुपए प्रति किलो के भाव से विदेशों में भेजा जाता है. भारत में खपत सीमित होने से लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन निर्यात किया जाता है. मुंबई, राजस्थान और गुजरात की कंपनियों के माध्यम से अमेरिका, रूस, ब्रिटेन सहित 15 से अधिक देशों में जालोर का किनोवा पहुंच रहा है. प्रोटीन, फाइबर, आयरन, जिंक, कैल्शियम और सभी 9 आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर तथा ग्लूटेन-फ्री होने के कारण ‘सुपरफूड' के रूप में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. संघर्ष से सफलता तक की यह कहानी अब जालोर के किसानों के लिए नई उम्मीद बन चुकी है.