Jalore News: राजस्थान के जालोर जिले का जीवाणा-सायला इलाका अब देश का नंबर वन अनार हब बनता जा रहा है. यहां उगाए जाने वाले 'सिंदूरी अनार' अपनी बेहतरीन क्वालिटी, रंग, मिठास और लंबे समय तक फ्रेशनेस बनाए रखने की क्षमता के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है.यहां उगाए जाने वाले अनार का वजन एवरेज 750 ग्राम होता है. जबकि दूसरे अनारों का वजन करीब 150 से 250 ग्राम तक होता है. इसकी क्वालिटी 15 दिन तक खराब नहीं होती. इसी वजह से इसकी डिमांड बांग्लादेश और खाड़ी देशों तक पहुंच गई है.
3 महीनों में 1500 करोड़ का व्यापार
राज्य की सबसे बड़ी जीवाणा अनार मंडी में इस समय अनार की भारी आवक शुरू हो गई है.हर साल दिसंबर से फरवरी के बीच यहां करीब 90 हजार टन अनार बिकता है, जिससे करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. आपको बता दें कि जालोर जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर एरिया में अनार की खेती हो रही है.इस साल जिले में अनार का प्रोडक्शन करीब 8 लाख टन होने का अनुमान है.
15 साल में 5 गुना बढ़ा खेती का रकबा
करीब 15 साल पहले यहां अनार की खेती सीमित थी, लेकिन आज यह पूरे इलाके की पहचान बन गई है. 2010-11 में एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के ज़रिए किसानों को महाराष्ट्र का टूर कराया गया. वहां से मॉडर्न टेक्नीक और वैरायटी सीखने के बाद किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ दी. अकेले जीवाणा इलाके में 5000 हेक्टेयर में अनार की खेती हो रही है. जहां पहले 1000 हेक्टेयर में खेती होती थी, अब यह आंकड़ा कई गुना बढ़ गया है. अब इस प्रोडक्शन एरिया में 12 पंचायतों के 22 गांव शामिल हैं.
जालोर का सिंदूरी अनार
जालोर का सिंदूरी अनार
Photo Credit: NDTV
महाराष्ट्र से व्यापारी, जीवाणा की ओर रुख
जब महाराष्ट्र में अनार का सीजन खत्म होता है, तब जीवाणा मंडी में मांग चरम पर पहुंच जाती है. हर सीजन में यहां 1000 से अधिक व्यापारी पहुंचते हैं, जिनमें महाराष्ट्र के बड़े कारोबारी भी शामिल होते हैं.पिछले वर्षों में नासिक से 25–30 लाख पौधे भी मंगवाए गए थे, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ.
सिंदूरी अनार क्यों है खास?
यह अनार गहरा लाल रंग का होता है. इसमें अधिक मिठास , ज्यादा पोषक तत्व होते है. इसका वजन तकरीबन 750 ग्राम तक होता है. इसकी सबसे ज्यादा खासियत यह होती है कि यह 15 दिन तक खराब नहीं होता है, वही दूसरे किस्म कि अनारों में कुछ ऐसे होते है जो हफ्ते भर में खराब हो जाते है. उनके दानों का रस सूख जाता है.
इसी वजह से यह अनार विदेशी बाजारों में भी पसंद किया जा रहा है.
मजबूत होता मंडियों का नेटवर्क
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अनार की खेती अब किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे बड़ा जरिया बन गई है. बाड़मेर और जैसलमेर जैसे रेतीले इलाकों से भी किसान अपना अनार लेकर जीवाणा मंडी पहुंचे हैं. अनार के मिल रहे उचित दामों ने किसानों के जीवन स्तर में भारी सुधार किया है. क्षेत्र में व्यापार को सुगम बनाने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है. पहले जहां निजी स्तर पर केवल 11 मंडियां संचालित थीं, अब उनमें3 नई मंडिया और जुड़ चुकी हैं. इस सीजन में कुल8 मंडियां पूरी सक्रियता के साथ काम कर रही हैं, और आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है.
आधुनिक सुविधाएं और सही दाम
अब केवल फसल उगाना ही नहीं, बल्कि उसकी ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग पर भी जोर दिया जा रहा है. क्षेत्र में नई प्रोसेसिंग इकाइयां शुरू होने से अनार की वैल्यू बढ़ गई है. नई मंडियों में अत्याधुनिक क्वालिटी चेकिंग की सुविधा उपलब्ध है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर सही और पारदर्शी कीमत मिल रही है.
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