जेईएन भर्ती–2021 पेपर लीक: 20 लाख में डील, आंसर-की रटकर बना अफसर, अब खुल रहा है पूरा नेटवर्क

एसओजी ने खुलासा क‍िया क‍ि परीक्षा से पहले ही पेपर म‍िल गया, ज‍िसे रटकर एग्‍जाम द‍िए. एक-एक प्रश्‍न को रटवाकर भेजा गया. 

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जेईएन भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में एसओजी ने गुरुवार (29 जनवरी) को एक आरोपी एईएन गणपत लाल विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया है.

जेईएन भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में एसओजी ने गुरुवार (29 जनवरी) को एक आरोपी एईएन गणपत लाल विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया है. एसओजी ने खुलासा किया है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर 8 से 20 लाख रुपए में बेचा गया, जिसमें अभ्यर्थियों को आंसर-की तक रटवा दी जाती थी. जालोर जिले के डेडवा निवासी गणपत लाल विश्नोई ने एग्‍जाम से पहले ही पेपर हासिल कर लिया था. उसने पूरी आंसर-की याद कर ली, और परीक्षा में प्रदेशभर में 12वीं रैंक हासिल कर ली. बाद में वह पीडब्ल्यूडी में जेईएन बना और प्रमोशन पाकर एईएन तक पहुंच गया.

बाड़मेर XEN ऑफिस में तैनात था 

गणपत लाल वर्तमान में बाड़मेर के एक्सईएन कार्यालय में एईएन के पद पर तैनात था. एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और पुलिस रिमांड पर लिया है. उससे नेटवर्क में जुड़े अन्य अफसरों और बिचौलियों के बारे में पूछताछ की जा रही है, जो इसमें लिप्त थे. 

2020 में पेपर रद्द, 2021 में फिर लीक

कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 का पेपर लीक होने पर परीक्षा रद्द की गई थी. इसके बाद 12 सितंबर 2021 को दोबारा परीक्षा करवाई गई. फ‍िर से पेपर लीक हो गया. एसओजी की जांच में सामने आया कि इस बार भी वही गिरोह सक्रिय था, और पेपर पहले ही आउट हो गया. 19 जनवरी 2026 को एसओजी ने नया केस दर्ज किया. 

मुख्य सरगना जगदीश विश्नाेई 

पेपर लीक गिरोह का मुख्य सरगना दांता निवासी जगदीश विश्नोई है, जिसे एसओजी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. जांच में सामने आया कि जगदीश और उसके नेटवर्क के पास पेपर पहले से था. 8 से 20 लाख रुपए तक की डील हुई. अभ्‍यर्थ‍ियों को पेपर देकर रटाया. इसके बाद वे एग्‍जाम में बैठे. 

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जगदीश पर 13 केस दर्ज हो चुके हैं

पेपर लीक गिरोह का मुख्य सरगना जगदीश पर कुल 13 केस दर्ज हैं. उसे 7 में जमानत म‍िल चुका है, और 5 में बरी हो चुका है. 13वें केस में फिर गिरफ्तारी हुई है. 

चौंकाने वाला मिलान

एसओजी की जांच में यह भी सामने आया कि 2020 में जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की थी, उनमें से अधिकांश 2021 में भी सफल रहे. यह संयोग नहीं, बल्कि लीक पेपर नेटवर्क की निरंतरता का बड़ा सबूत है. 

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