राजस्थान के झालावाड़ जिले की खेरखेड़ा ग्राम पंचायत का टांडी गांव सामाजिक सुधार की दिशा में एक मिसाल बनकर उभरा है. गांव के भील समाज के लोगों ने आपसी सहमति से शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची और दिखावे पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य आर्थिक बचत के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों को दूर करना है. ग्रामीणों के मुताबिक, भील समाज ने विशेष रूप से शादी समारोहों में डीजे और कंजरी डांस पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर प्रतिबंध लगाया है.
टांडी में हुई बैठक में पंचों ने लिया था निर्णय
इस फैसले के बारे में टांडी गांव के भील समाज के लोगों ने जावर थाना अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में समाज के नियमों का पालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग की मांग की गई है. ज्ञापन में बताया गया कि भील समाज द्वारा 30 दिसंबर 2025 को टांडी में एक बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में समाज के पंचों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि भील समाज के विवाह कार्यक्रमों में डीजे और कंजरी डांसर नहीं बुलाए जाएंगे.
समाज ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे दंड का भागी होना पड़ेगा और वह राज पंचों के सामने गलत साबित होगा. डीजे और कंजरी पर प्रतिबंध के अलावा, बैठक में कुल 9 अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी सहमति बनी.
बैठक में इन प्रमुख बिंदुओं पर बनी सहमति
- शादी में सगे भाई के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कपड़े की पहरावनी न लाना (अन्य लोग पैसे दे सकते हैं, लेकिन पहरावनी बंद रहेगी).
- शादी समारोह में 500 ग्राम चांदी लाना अनिवार्य होगा.
- दहेज में केवल 5 बर्तन दिए जाएंगे, इससे अधिक की मांग नहीं की जाएगी.
इसके अलावा मृत्यु भोज को कम खर्च में आयोजित करने, बहन-बेटियों को किसी के साथ मजदूरी करने न भेजने, भील समाज के लड़के-लड़कियों की पढ़ाई पर जोर देने, शादी में अमर्यादित गीत न गाने और सरकारी विद्यालयों की पीटीएम (पेरेंट-टीचर मीटिंग) में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए.
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