महेश जोशी ने लाखों की रिश्वत को बेटे की फर्म में किया था ट्रांसफर? JJM घोटाले में एसीबी की चार्जशीट में सवाल

एसीबी की जांच के मुताबिक, 7 अप्रैल से 5 जुलाई 2023 के बीच रोहित जोशी की फर्म के खाते में करीब 50 लाख रुपये जमा किए गए. यह रकम अलग-अलग कंपनियों के जरिए ट्रांसफर की गई थी.

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जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने चार्जशीट दायर की. अब पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के साथ उनके बेटे रोहित जोशी की फर्म से भी कनेक्शन जोड़ा जा रहा है. जांच एजेंसी का दावा है कि जिस समय महेश जोशी जलदाय विभाग के मंत्री थे, उसी दौरान रोहित जोशी की फर्म के बैंक खाते में लाखों रुपये जमा हुए और बाद में उसी खाते से पूर्व मंत्री के निजी खाते में भी राशि ट्रांसफर की गई. चार्जशीट के अनुसार, सुमंगलम लैंडमार्क एलएलपी नामक फर्म का गठन अक्टूबर 2021 में किया गया था. फर्म में रोहित जोशी की 80 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है. एसीबी का कहना है कि जांच के दौरान फर्म का कोई सक्रिय कारोबारी संचालन सामने नहीं आया और यह घाटे में चल रही थी.

रिश्वत की रकम को जायज दिखाने का खेल?

जांच एजेंसी के मुताबिक, 7 अप्रैल से 5 जुलाई 2023 के बीच फर्म के खाते में अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से करीब 50 लाख रुपये जमा किए गए. एसीबी का दावा है कि इन लेन-देन का फर्म के नियमित व्यवसाय से कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला. चार्जशीट में इसे कथित रिश्वत की रकम को वैध दिखाने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है.

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चार्जशीट में उल्लेख है कि 24 फरवरी 2023 को इसी फर्म के खाते से आरटीजीएस के जरिए 30 लाख रुपये महेश जोशी के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी इस ट्रांजैक्शन को भी मामले की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है.

2 फर्म को टेंडर मामले में गड़बड़ी के आरोप

एसीबी का आरोप है कि जलदाय विभाग की दो ठेका कंपनियों श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को फर्जी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और एलओए के आधार पर बड़ी संख्या में टेंडर मिले. जांच में यह भी दावा किया गया है कि दस्तावेजों को सही साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर विभाग को सत्यापन संबंधी मेल भेजे गए.

महेश जोशी खारिज कर चुके हैं आरोप

इस मामले में पूर्व कैबिनेट महेश जोशी पहले ही अदालत में अपना पक्ष रख चुके हैं. उनका कहना है कि उनके पुत्र की फर्म में जो 50 लाख रुपये आए थे, वे लोन के रूप में प्राप्त हुए थे और बाद में लौटा दिए गए. चार्जशीट सामने आने के बाद जांच के दायरे और आरोपियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि जब जांच एजेंसी ने फर्म के खातों में हुए लेन-देन को संदिग्ध माना है, तब भी रोहित जोशी का नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं किया गया. अब इस पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी.

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