जोधपुर में 360 करोड़ से बनेगा देश का पहला वंदे भारत स्लीपर डिपो, जानें किन हाईटेक तकनीकों से होगा लैस

देश का पहला वंदे भारत स्लीपर डिपो जोधपुर के भगत की कोठी में 360 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है. पहले फेज का 85% काम पूरा हो गया है, जिसे कई आधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है.

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Jodhpur Vande Bharat Sleeper Depo
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Indai's First Jodhpur Vande Bharat Sleeper Depot:  राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी और 'ब्लू सिटी' के नाम से मशहूर जोधपुर अब भारतीय रेलवे के हाईटेक भविष्य का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन के पास लगभग 360 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला 'वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो' ( Vande Bharat Sleeper Depot) तैयार किया जा रहा है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) बल्कि पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाली है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) के गृह जिले को मिली इस सौगात से स्थानीय रोजगार, पर्यटन और यहां की प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा.

वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो
Photo Credit: वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो

पहले चरण का 85% काम पूरा

ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इस हाईटेक डिपो के प्रथम चरण का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. जल्द ही इसके द्वितीय चरण का काम भी शुरू होने जा रहा है, जिससे इस परियोजना को और गति मिलेगी.

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वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की यात्रा की अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जनरेशन) माना जा रहा है. इन्हीं ट्रेनों के विश्वस्तरीय रखरखाव के लिए जोधपुर में यह आधुनिक मॉडल विकसित किया जा रहा है, जहां निरीक्षण से लेकर मरम्मत तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी. जिसमें   निरीक्षण, मरम्मत, व्हील मेंटेनेंस, बोगी रिपेयर और स्वचालित धुलाई जैसी सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध रहेंगी.

कई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन एक साथ हो सकेंगी खड़ी
Photo Credit: NDTV

एक साथ 24 कोच वाली ट्रेन का होगा मेंटेनेंस

 इस परियोजना के प्रथम चरण में 600 मीटर लंबा मुख्य मेंटेनेंस ट्रैक तैयार किया जा रहा है, जिसमें एक बार में 24 कोच वाली पूरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को खड़ा कर उसका रखरखाव किया जा सकेगा. इसके अलावा 3 कवर पिट लाइनों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे  एक साथ तीन ट्रेनों का निरीक्षण और मरम्मत संभव होगा. निश्चित रूप से यह क्षमता देश के अधिकांश मौजूदा डिपो की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है.

आधुनिक तकनीकों से किया गया है लैस

इस डिपो की सबसे बड़ी विशेषता की बात करें तो यहां स्थापित होने वाले उपकरण अत्याधुनिक होंगे, जिसमे ड्रॉप पिट टेबल, जिसकी मदद से भारी बोगियों को आसानी से अलग किया जा सकेगा, जबकि सिंक्रोनाइज्ड लिफ्टिंग सिस्टम पूरी ट्रेन को एक साथ ऊपर उठाकर निरीक्षण और मरम्मत का कार्य तेज एवं सुरक्षित बनाएगा.

वहीं पिट व्हील लेथ तकनीक के माध्यम से ट्रेन को अलग किए बिना ही उनके पहियों की प्रोफाइलिंग और मरम्मत की जा सकेगी. साथ ही डिपो में ऑटोमेटेड वाशिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा, जो कम समय में पूरी ट्रेन की सफाई करेगा.

इसके अलावा एयर ब्रेक सिस्टम परीक्षण, बोगी निरीक्षण, अंडर कैरिज चेकिंग और अन्य तकनीकी जांच की आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं. रेलवे यहां एक समर्पित टेस्टिंग लैब और उन्नत व्हील मेंटेनेंस शेड भी विकसित करने की योजना पर कार्य कर रहा है .

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आधुनिक सुविधाएं भी विकसित
Photo Credit: आधुनिक सुविधाएं भी विकसित

जल्द शुरू होगा दूसरा फेज

पहले फेस को सफलतापूर्वक खत्म करने के बाद रेलवे यहां द्वितीय चरण का कार्य शुरू जिसमें इंजीनियरों और टेक्निकल एम्पलाइज के प्रशिक्षण के लिए आधुनिक सिमुलेटर रूम और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. इससे जोधपुर केवल मेंटेनेंस हब ही नहीं बल्कि रेलवे तकनीकी स्किल डेवलपमेंट के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी उभरेगा.

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