कोटा की अरुंधती चौधरी ने एशियन चैंपियनशिप में जीता GOLD, कजाकिस्तान की बॉक्सर को धूल चटाकर मंगोलिया में गाड़ा तिरंगा

राजस्थान की मुक्केबाज अरुंधती चौधरी ने मंगोलिया में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया है. 70 किलोग्राम भार वर्ग में अरुंधती ने कजाकिस्तान की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. सेना की ओर से खेलने वाली कोटा की इस बेटी की जीत से देशभर में जश्न का माहौल है.

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मंगोलिया में गूंजा भारत का नाम, अरुंधती ने जीता सोना.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के कोटा की 'गोल्डन गर्ल' अरुंधती चौधरी (Arundhati Choudhary) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह रिंग की असली क्वीन हैं. गुरुवार को मंगोलिया (Mongolia) में खेली जा रही एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप (Asian Athletics Championships) के फाइनल मुकाबले में अरुंधती ने कजाकिस्तान की बॉक्सर बख्येत सेईदिश (Bakhyet Seidish) को करारी शिकस्त दी. 70 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हुए अरुंधती ने शुरुआत से ही अपनी विपक्षी खिलाड़ी पर दबाव बनाए रखा और 5-0 से हराकर अंत में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया.

कजाकिस्तान की बॉक्सर को नहीं दिया टिकने का मौका

9 अप्रैल की सुबह से ही पूरे देश की नजरें इस फाइनल मुकाबले पर टिकी थीं. अरुंधती ने रिंग में उतरते ही अपने सधे हुए पंचों से कजाकिस्तान की बख्येत सेईदिश को बैकफुट पर धकेल दिया. फाइनल राउंड में अरुंधती की फुर्ती और तकनीक का विरोधी बॉक्सर के पास कोई जवाब नहीं था. जीत की घोषणा होते ही मंगोलिया के खेल मैदान में तिरंगा लहरा उठा.

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सेना की टीम से खेलती हैं अरुंधती, पहले भी जीते कई पदक

कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अरुंधती फिलहाल भारतीय सेना की टीम का प्रतिनिधित्व करती हैं. उनके कोच अशोक गौतम ने बताया कि अरुंधती की मेहनत आज रंग लाई है. इससे पहले भी वह जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड और बुल्गारिया में हुए स्ट्रैंड्जा मेमोरियल में सिल्वर मेडल जीतकर अपना लोहा मनवा चुकी हैं. उनके नाम अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधा दर्जन से ज्यादा गोल्ड मेडल दर्ज हो चुके हैं.

कोटा में जश्न: पिता सुरेश चौधरी ने कहा- 'अगला लक्ष्य ओलंपिक'

अरुंधती की इस ऐतिहासिक जीत के बाद कोटा में उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. पिता सुरेश चौधरी और माता सुनीता चौधरी ने बेटी की कामयाबी पर खुशी जाहिर की है. परिजनों और जिला मुक्केबाजी संघ को अब उम्मीद है कि अरुंधती का अगला पंच सीधा ओलंपिक में पदक पर लगेगा.

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