Kota Coaching Crisis: देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षा के बेहतरीन नतीजे को लेकर अपनी पहचान रखने वाली कोचिंग सिटी कोटा पर इन दिनों संकट के बादल छाए हुए हैं. कोचिंग स्टूडेंटस की तादाद में 30 से 35% आई गिरावट ने हजारों लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है. कामयाबी की दहलीज तक लेकर जाने वाले कोटा में छाए संकट के बाद कई नवाचार किया जा रहे हैं, ताकि देश भर से आने वाले कोचिंग स्टूडेंट्स को वापस बुलाया जा सके. सुरक्षा के वादे, मोटिवेशन और हॉस्टल्स की फीस में कमी करने के बावजूद ये सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कोटा के वह दिन फिर लौटेंगे?
कोटा से निकलते हैं देश के टॉपर
कोटा को डॉक्टर-इंजीनियर्स की फैक्ट्री भी कहा जाता है. यहां से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई स्टूडेंट्स ने देश में टॉप रैंक दिया है. या यूं कहें तो लगातार टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्र यहां के कोचिंग से पढ़कर निकले हैं. लेकिन इन दिनों ऐसा माहौल बना दिया गया कि सभी अभिभावकों के मन में यह शंका पैदा हो गई. लोग अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं और यहां तैयारी नहीं करवाना चाह रहे हैं. इसकी बड़ी वजह यहा लगातार बढ़ने लगे सुसाइड मामले थे. हालांकि इस मामले पर प्रशासन गंभीरता से संज्ञान ले रहा है और लोगों को यहां आने के लिए सभी तरह से मोटिवेट कर रहा है.
कोटा स्टूडेंट्स को मोटिवेट करते अधिकारी.
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स्टूडेंट को दिया जा रहा बेहतर माहौल
जिला प्रशासन से लेकर कोचिंग इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोग कोटा में शिक्षा के बेहतर माहौल की पहचान को फिर कायम करने में जुटे हुए हैं. जो स्टूडेंट कोटा में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें स्टूडेंट को सुरक्षा के साथ शिक्षा का बेहतर माहौल, अभिभावकों की जेब पर कम भार इन सबको को लेकर नवाचार किये जा रहे हैं. ताकि कोटा फिर से स्टूडेंट्स से गुलजार हो सके. स्टूडेंटस फ्रेंडली इको सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं.
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