कोटा के अस्पताल में उस रात क्या हुआ? 'इंजेक्शन' लगते ही बिगड़ी 6 प्रसूताओं की हालत, 2 की मौत, अब फाइलें गायब!

Kota Hospital C-section Death Case: कोटा के अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के पीछे का सच अब 'गायब फाइलों' में उलझ गया है. परिजनों का दावा है कि एक गलत इंजेक्शन ने सब उजाड़ दिया और अब अस्पताल प्रशासन बच्चे के इलाज के लिए नई पर्ची बनवाने के लिए कह रहा है. पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.

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कोटा में अब तक 2 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. अन्य दो ही हालत नाजुक बनी हुई है.
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Rajasthan News: कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले कुछ घंटे किसी भयावह सपने से कम नहीं रहे. सोमवार रात और मंगलवार सुबह के बीच सिजेरियन ऑपरेशन के लिए गईं 6 प्रसूताओं में से 2 की गुरुवार सुबह तक मौत हो गई, जबकि अन्य 4 का इलाज अस्पताल के आईसीयू और नेफ्रोलॉजी वार्ड में चल रहा है. इनमें से 2 की हालत नाजुक बताई जा रही है और डॉक्टर्स उन्हें जयपुर के SMS अस्पताल में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं. इसी वजह से अस्पताल में हड़कंप मचा हुआ है.

अब तक 2 प्रसूताओं की मौत

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद जब पेशेंट को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया, तब हॉस्पिटल स्टाफ ने उन्हें एक ऐसा इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई. इसी के चलते सबसे पहले पायल नाम की महिला की मौत हुई, जिसके बाद ज्योति ने भी दम तोड़ दिया.

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'पुरानी फाइलें गायब कर दीं'

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NDTV राजस्थान ने जब मृतका ज्योति के परिजनों से इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने कहा, 'डॉक्टर ने सिर्फ इतना बताया कि ज्योति अब नहीं रही. उसका नवजात बच्चा फिलहाल डॉक्टर्स की देखरेख में है. लेकिन अब डॉक्टर हमसे नई पर्ची बनवाने के लिए कह रहे हैं. उन्होंने पेशेंट की पुरानी फाइल गायब कर दी है. हमें बस वो फाइल चाहिए, क्योंकि उसी से पता चलेगा कि क्या दवा दी गई थी. दुनिया के सामने सच तभी आएगा. उसके बाद ही हम शव को यहां से उठाएंगे. ऑपरेशन के बाद इन्होंने दवाई का गलत डोज दिया है. सारी जिम्मेदारी अस्पताल की है.'

जयपुर शिफ्ट करने की तैयारी

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अस्पताल में भर्ती अन्य प्रसूताओं के परिजन भी बुरी तरह डरे हुए हैं. एक परिजन ने रोते हुए बताया कि अब डॉक्टर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाने की सलाह दे रहे हैं. परिजनों का कहना है कि वे पहले ही सरकारी अस्पताल में इलाज कराकर भुगत रहे हैं, ऐसे में दूसरे सरकारी अस्पताल में जाने से क्या गारंटी है कि मरीज ठीक हो जाएगा.

महिलाओं को क्या-क्या दिक्कतें हैं?

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन के मुताबिक, प्रभावित महिलाओं में प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड प्रेशर कम होना और यूरिन आउटपुट बंद होने जैसे गंभीर लक्षण देखे गए हैं. डॉक्टरों की टीम ने बताया कि इन महिलाओं की किडनी में इंफेक्शन फैल गया है. विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार उनकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं.

'फाइल गायब' होने पर क्या कहा?

जब परिजनों के फाइले गायब होने के आरोप पर NDTV राजस्थान ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन से बातचीत की तो उन्होंने कहा, 'हमारी शुरुआती जांच में ऐसा कुछ भी नहीं आया है. किसी भी कर्मचारी की कोई लापरवाही सामने नहीं आई है. हम आगे भी जांच कर रहे हैं.'

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मुंडन, प्रदर्शन और मुआवजे की गूंज

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अस्पताल के बाहर का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मृतकों के परिजन धरने पर बैठे हैं. विरोध का स्तर इतना बढ़ा कि कांग्रेस नेता चेतन सोलंकी ने अस्पताल के गेट पर ही अपना मुंडन करवा लिया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को जेल भेजा जाए और पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा मिले.

सरकार ने दिया जांच का भरोसा

इस मामले पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है और मामले की हाई लेवल जांच कराई जा रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा. इस बीच, जयपुर से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम कोटा पहुंच चुकी है. टीम ने देर रात अस्पताल का विश्लेषण किया और टेक्निकल पहलुओं की जांच की. 

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कलेक्टर भी पहुंचे अस्पताल

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उधर, कोटा कलेक्टर पीयूष सामरिया भी गुरुवार सुबह अस्पताल पहुंचे और जयपुर से आई विशेषज्ञों की टीम के साथ हालात का जायजा लिया. उन्होंने NDTV को बताया कि जयपुर की टीम ने दवाओं और अन्य तकनीकी चीजों के सैंपल्स लिए हैं, जिनकी जांच एफएसएल (FSL) के जरिए की जा रही है. उन्होंने बताया कि मौत की असली वजह रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी.

लोकसभा स्पीकर ने भी लिया जायजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अस्पताल का दौरा किया और भर्ती महिलाओं का हाल जाना. उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. 

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हालांकि, अस्पताल प्रबंधन अभी भी इसे 'कॉम्प्लिकेशन' बता रहा है, लेकिन परिजनों के आरोप और गायब दस्तावेजों की कहानी किसी बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रही है. अब सबकी नजरें एफएसएल और डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस 'मेडिकल मिस्ट्री' से पर्दा उठाएगी.

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