कोटा शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस की इमरजेंसी सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. हॉस्पिटल में इलाज ना मिलने के चलते बारां की रहने वाली उर्मिला बाई ने दम तोड़ दिया. सड़क हादसे में घायल होने के बाद महिला को 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया था. आरोप है कि घायल महिला को अस्पताल पहुंचने के बाद समय पर उपचार नहीं मिला. इलाज के अभाव में ही महिला की मौत की हो गई. घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एंबुलेंसकर्मी बार-बार गुहार लगा रहा है. बावजूद इसके घायल महिला को देखने वाला वहां कोई नहीं था.
स्ट्रेचर के लिए भी करनी पड़ी मशक्कत
मामला सिर्फ इलाज मिलने भर का नहीं है. हॉस्पिटल में बुनियादी सुविधाओं के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है. एंबुलेंसकर्मी लीलाधर पारेता के अनुसार, इमरजेंसी गेट पर स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था. अस्पताल स्टाफ ने पहले आधार कार्ड की मांग की. काफी प्रयास के बाद स्ट्रेचर की व्यवस्था हुई और मरीज को अंदर ले जाया गया.
डॉक्टरों के बीच तालमेल पर भी सवाल!
आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड के अंदर भी डॉक्टरों के बीच केस को लेकर समन्वय की कमी रही और इलाज शुरू करने में देरी होती रही. इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई. एंबुलेंसकर्मी का कहना है कि ऑक्सीजन और मॉनिटर लगाने की बार-बार मांग के बावजूद किसी ने सुनवाई नहीं की.
अधीक्षक ने लगाई फटकार, जांच शुरू
घटना के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्टाफ को फटकार लगाते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश दिए. इस घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. फिलहाल जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा.
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