Rajasthan: बाघों की मांद में जा घुसा कूनों का चीता KP2, एक्सपर्ट बोले- 'इंसान नहीं, अब कुदरत ही बचाएगी जान'

Rajasthan News: चीता KP2 रणथंभौर के जोन 9 में घुसा, जिससे बाघों और तेंदुओं से उसे जान का खतरा बन गया है क्योंकि यह इलाका इनका घर है. ऐसे में वन विभाग लगातार उसकी निगरानी में लगा है.

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kuno cheetah kp2 in Zone 9 Ranthmabore
NDTV

Ranthmabore News: मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के रणथंभौर पहुंचे चीते KP2 की जान पर इस समय भारी संकट मंडरा रहा है. रणथंभौर के जिस जोन नम्बर 9 में KP2 का मूवमेंट है ,उसमें बाघ-बाघिन सहित बड़ी तादात में लेपर्ड का भी मूवमेंट रहता है. ऐसे में अगर उसका सामना किसी बाघ- बाघिन अथवा लेपर्ड से होगा तो उसकी जान को खतरा पैदा हो सकता है, हालांकि वन विभाग इसे लेकर सतर्क है और टीमें लगातार चीता KP2 की मॉनिटरिंग में जुटी हुई है. 

चीता के गले में लगे रेडियो कॉलर से रखी जा रही है नजर

आज (सोमवार) से करीब एक सप्ताह पूर्व मध्यप्रदेश के कुनो से निकला चिता KP 2 चम्बल नदी पार कर रणथंभौर की सीमा में कल यानी रविवार को फिर से दाखिल हुआ है. वह रणथंभौर की पालीघाट रेंज के अजीतपुरा गांव के नजदीक चिता पहली बार ग्रामीणों को दिखाई दिया. ग्रामीणों की सूचना पर रणथंभौर वन प्रशासन की टीम चिता की मॉनिटरिंग में जुट गई, वही चीता के गले में लगे रेडियो कॉलर के माध्यम से कुनो से वनकर्मियों की एक टीम भी चिता को ढूंढते हुए रणथंभौर आ पहुंची और वन प्रशासन की टीम के साथ मिलकर चिता की मॉनिटरिंग में जुटी हुई है 

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बाघ और बाघिन के साथ लेपर्ड का भी घर है जोन 9

चीता KP2 पालीघाट रेंज के अजीतपुरा से निकलकर लहसोड़ा होते हुए रणथंभौर की आरओपीटी रेंज में प्रवेश कर गया ,जहां उसका मूवमेंट रणथंभौर के जोन नम्बर 9 में बना हुआ है , और उसी  जोन में रणथंभौर की बाघिन टी 127 व बाघ टी 108 का मूवमेंट रहता है ,जो चीते की जान लिए किसी खतरे से कम नहीं है. इतना ही नहीं, बाघ और बाघिन के साथ ही जोन नंबर 9 में बड़ी संख्या में लेपर्ड का भी मूवमेंट रहता है ,ऐसे में जिस इलाके में  KP घूम रहा है वो इलाका किसी भी सूरत में उसके लिए सुरक्षित नहीं है.  

चीता KP2 को लेकर वन विभाग अलर्ट मोड़ पर

इसी को लेकर रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि कुनो का यह चीता KP2 करीब 20 दिन पूर्व भी मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के कोटा बूंदी के क्षेत्र में आ गया था ,जिसे ट्रेकुलाइज कर वापस कुनो ले जाया गया , लेकिन कुछ ही दिनों बाद एक बार फिर से यह वहां से निकलकर चम्बल नदी पार कर रणथंभौर आ पहुंचा है. डीएफओ ने आगे बताया कि रणथंभौर टाईगर हाई डेनसिटी वाला टाईगर रिजर्व है ऐसे में चिता की जान को रणथंभौर में खतरा है ,चिता की सुरक्षा को लेकर रणथंभौर एंव कुनो वन प्रशासन अलर्ट मोड़ पर है. 

कूनों से क्यों बार-बार भाग रहे चीते?

वन्यजीव विशेषज्ञ धर्मेंद्र खांडल ने कुनो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुनो के चारों ओर पांच टाइगर रिजर्व (शिवपुरी, मुकुंदरा, रामगढ़, धौलपुर-करौली, रणथंभौर) हैं. ऐसे में चीतों का बाहर निकलना उनके लिए सीधा सुसाइड मिशन है. खांडल ने चेतावनी दी है कि चीतो को रणथंभौर में टाइगर से ज्यादा खतरा लेपर्ड्स से है. मानवीय उपायों से चीते की जान बचाना मुश्किल है, यह अब पूरी तरह 'प्राकृतिक संघर्ष' पर निर्भर है. इस भीषण गर्मी में बार-बार ट्रेंकुलाइज करना भी चीते के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

KP2 के साथ एक मादा चीता ने भी छोड़ा कूनों

वहीं सूत्रों से मिली जानकारी ने कूनों वन विभाग की चिंता और बढ़ा दी है. एक ओर नर चीता कुनो से निकलकर चंलब नदी पार कर चुका है और रणथंभौर की तरफ बढ़ रहा है , वही एक दूसरी तरफ एक मादा चीता ने भी अपने शावकों के साथ कुनो से निकलकर कर चम्बल पार कर रही है ,अगर वह रणथंभौर आ गई तो ऐसे में एक साथ तीन चीतों का होना वन विभाग के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है.

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