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This Article is From Mar 28, 2026

Rajasthan: कूनो के चीतों को भाया राजस्थान, कभी पेड़ों के नीचे आराम तो कभी खेतों में सैर, कोटा-बारां में केपी-2 का डेरा

Rajasthan News: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से भटककर चीता केपी-2 और केपी-3 राजस्थान के कोटा और बारां पहुंचे. वन विभाग की टीमें लगातार रख रही है कड़ी निगरानी.

Rajasthan: कूनो के चीतों को भाया राजस्थान, कभी पेड़ों के नीचे आराम तो कभी खेतों में सैर, कोटा-बारां में केपी-2 का डेरा
Cheetah KP-2 Kota, Cheetah KP-3 Baran
IANS

Cheetah in Rajasthan Village: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर चीतों का राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में आने का सिलसिला जारी है. ताजा मामले में, मादा चीता 'आशा' के 2.5 साल के शावक केपी-2 (KP-2) के कोटा जिले के सुल्तानपुर इलाके में पहुंचने से हड़कंप मच गया है. मदनपुरा पंचायत के पीपल्दा सम्मेल गांव के खेतों और रिहायशी इलाकों में चीते को घूमते देख ग्रामीणों में भारी दहशत है, जिसके चलते लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं.

खेतों में आराम और पुलिस का पहरा

चीता केपी-2 को शुक्रवार को  किसानों ने पहली बार अपने खेतों और रिहायशी इलाकों से गुजरते हुए देखा. उन्होंने तुरंत वन विभाग और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी. साथ ही गांव वालों ने अपने घरों के अंदर ही रहना बेहतर समझा.

'आशा' के दो शावक केपी-2 और केपी-3 की जुगलबंदी

अधिकारियों के अनुसार, न केवल केपी-2 बल्कि उसका भाई केपी-3 भी पिछले तीन सप्ताह से बारां जिले के मंगरोल रेंज में डेरा डाले हुए है. ये दोनों अफ्रीकी चीता 'आशा' के शावक हैं. राजस्थान और कूनो नेशनल पार्क की वन टीम मिलकर इन दोनों चीतों पर 24 घंटे नजर रख रही हैं. अधिकारियों ने बताया कि चीते को पेड़ों के नीचे आराम करते हुए और खेतों तथा रिहायशी इलाकों से सावधानी से गुजरते हुए देखा गया है. उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान की राज्य की सीमा से निकटता के कारण केपी-2 और एक अन्य चीता, केपी-3, बार-बार राजस्थान में प्रवेश कर रहे हैं.

विशेषज्ञों की राय में हमलावर नहीं होते चीते

वहीं, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से राजस्थान के इलाकों में भटकते दो चीतों की हालिया गतिविधि पर ध्यान दिया है और इसे स्वाभाविक व्यवहार बताया है.जानकारों का मानना ​​है कि उनकी आवाजाही एक स्वाभाविक फैलाव प्रक्रिया को दर्शाती है, क्योंकि युवा चीते नए इलाकों की खोज करते हैं और अपने लिए अलग-अलग इलाके बनाते हैं.

सतर्क रहें पर घबराने की जरूरत नहीं

फिलहाल वन अधिकारियों ने  निवासियों से सतर्क रहने की अपील की है, लेकिन घबराने से मना किया है. उन्होंने कहा कि चीते आम तौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते हैं.

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